अमृतसर से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां मात्र 20 हजार रुपये की बकाया फीस ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली। 88 फीट रोड क्षेत्र की रहने वाली 17 वर्षीय अमजोत कौर ने स्कूल प्रबंधन द्वारा दी गई कथित मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर जहरीला पदार्थ निगल लिया। 31 मई को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था में छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
📹 मौत से पहले का वीडियो बना सबूत
अस्पताल में भर्ती होने के बाद अमजोत ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने अपनी आपबीती सुनाई। उसने आरोप लगाया कि 11 मई को उसे स्कूल बुलाकर फीस के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसे क्लास के व्हाट्सएप ग्रुप से भी हटा दिया गया। उसने स्पष्ट कहा कि उसकी इस हालत के लिए स्कूल प्रशासन जिम्मेदार है और उसे न्याय चाहिए।
🏫 स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
मृतका की मौसी सरबजीत कौर ने फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित डीडीआईएस स्कूल की प्रिंसिपल शबनम शर्मा और क्लास टीचर आकांक्षा शर्मा पर नामजद आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि फीस जमा कराने के लिए छात्रा पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह बेहद तनाव में थी।
⚖️ शिक्षा मंत्री का एक्शन और पुलिस जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने तुरंत संज्ञान लिया है। चौकी विजय नगर पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर संबंधित स्कूल स्टाफ के खिलाफ ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय टिप्पणी: एक शैक्षणिक संस्थान का उद्देश्य ज्ञान देना होता है, न कि फीस के नाम पर किसी बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ना। क्या आपको लगता है कि स्कूलों में फीस वसूलने के तरीकों पर सरकार को सख्त दिशा-निर्देश (जैसे फीस न जमा होने पर छात्र को प्रताड़ित न करना) अनिवार्य करने चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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