लखनऊ (उत्तर प्रदेश): नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय व तकनीकी अनियमितताओं का मामला अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय (इलाहाबाद हाईकोर्ट) की चौखट पर पहुंच गया है।
एक्सप्रेसवे निर्माण में भारी घोटाले और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए बिंदुवार ‘काउंटर एफिडेविट’ (जवाबी हलफनामा) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
🏛️ MoRTH सचिव, NHAI चेयरमैन और UP परिवहन प्रमुख सचिव को काउंटर एफिडेविट के निर्देश
माननीय उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि काउंटर एफिडेविट में जनहित याचिका (PIL) में उठाए गए प्रत्येक तथ्य, निर्माण गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के आरोपों पर विस्तृत व स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत की जाए। अब केंद्र सरकार, राज्य सरकार के संबंधित विभागों और एनएचएआई को कोर्ट के समक्ष अपना विधिक व तकनीकी पक्ष रखना होगा।
🌧️ पहली ही बारिश में धंसी सड़क, निर्माण कंपनी ‘पीएनसी इंफ्राटेक’ पर लगा प्रतिबंध
उल्लेखनीय है कि लगभग 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर मानसून की पहली बारिश में ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था।
सड़क धंसने से हुए जान-माल के खतरे और व्यापक जन-आक्रोश के बाद एनएचएआई ने तत्काल दंडात्मक कार्रवाई शुरू की। एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे का सिविल निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी ‘पीएनसी इंफ्राटेक’ (PNC Infratech) को भविष्य की किसी भी सरकारी परियोजना में भाग लेने और बोली लगाने (Bidding) से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही प्राधिकरण ने स्पष्ट आदेश दिया है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की पूरी मरम्मत ठेकेदार कंपनी को अपने स्वयं के खर्च पर करानी होगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3 करोड़ रुपये आंकी गई है।
🔬 IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम करेगी सड़क धंसने के कारणों की तकनीकी जांच
सड़क धंसने के सटीक वैज्ञानिक व तकनीकी कारणों का पता लगाने तथा स्थायी सुधारात्मक उपायों का सुझाव देने के लिए एनएचएआई ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. के. एस. रेड्डी के नेतृत्व में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ दल का गठन किया है।
इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण द्वारा आधुनिक ‘लेजर प्रोफाइलोमीटर’ (Laser Profilometer) तकनीक के आधार पर पूरे एक्सप्रेसवे के फुटपाथ और सड़क की संरचनात्मक मजबूती का गहन परीक्षण भी कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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