Balodabazar News: जंगलों को आग से बचाने की बड़ी पहल, बलौदाबाजार वनमण्डल में फायर सेफ्टी कार्यशाला; जनभागीदारी पर जोर

छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार: गर्मी के मौसम में जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए बलौदाबाजार वन मंडल ने बड़ी पहल की है. वन अग्नि सीज़न 2026 को (Fire Season 2026) देखते हुए बलौदाबाजार वनमण्डल ने एक वर्कशॉप का आयोजन किया. बल्दाकछार परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरबसपुर में वन अग्नि प्रबंधन को लेकर यह कार्यशाला आयोजित की गई. इस कार्यशाला में विभागीय तैयारियों पर चर्चा हुई. इसके साथ ही ग्रामीणों की सहभागिता, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई.

16 फरवरी से शुरू होगा अग्नि सीजन

बलौदाबाजार वनमंडल में इस कार्यशाला का आयोजन वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर के निर्देश पर हुआ. वे खुद भी इस कार्यशाला में मौजूद रहे. इस बार अग्नि सीजन 16 फरवरी 2026 से शुरू होकर 15 जून तक प्रस्तावित है. इसे देखते हुए यह कार्यशाला काफी अहम साबित हुई.

फायर के केसों पर हुई चर्चा

इस कार्यशाला में बीते पांच सालों के अंदर बलौदाबाजार वनमंडल के वनों में हुए फायर की घटनाओं पर समीक्षा की गई. इसमें बीट गार्डों, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्षों एवं सदस्यों के साथ आग की घटनाओं को लेकर विश्लेषण किया गया. इसमें यह चर्चा की गई कि आग लगने की प्रमुख वजहें क्या रहीं और किन क्षेत्रों में बार-बार घटनाएं सामने आईं. इन अनुभवों के आधार पर आगामी अग्नि सीज़न के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई. ज िससे आने वाले समय में वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा सके. इस चर्चा में अधिकारियों ने साफ कहा कि वन क्षेत्रों में आग को रोकने के लिए केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है.

जंगलों में लगने वाले आग के कारणों पर हुई चर्चा

फायर सेफ्टी की इस कार्यशाला में जंगलों में लगने वाले आग के कारणों को लेकर चर्चा हुई. इसमें यह बताया गया कि अधिकांश मामलों में आग प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही या जानबूझकर किए गए कारणों की वजह से लगती है. इसमें मुख्य रूप से बीड़ी और सिगरेट पीने के बाद उसके जले हुए टुकड़े को फेंकना शामिल है. इसके अलावा महुआ बीनने के दौरान पत्तों को जलाना, खेत में पराली जलाना मुख्य वजहें हैं. इस सभी बातों पर ग्रामीणों, समिति सदस्यों और वन कर्मचारियों के साथ चर्चा की गई. सभी से यह अपील की गई कि वे इन सब मामलों को लेकर सतर्क रहें और लोगों से भी इस तरह की लापरवाही न करने की अपील करें.

आग से जंगलों को होने वाले नुकसान पर चर्चा

इस कार्यशाला में वन अधिकारियों ने लोगों और वन कर्मियों को बताया कि आग से केवल जंगलों को नुकसान नहीं पहुंचता है. इससे बहुमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और जैव विविधता नष्ट होती है. इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता घटती है, जल स्रोत सूखने लगते हैं और स्थानीय जलवायु पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.आग से जंगलों को होने वाले नुकसान की वजह से लोगों के जीवन पर असर डालता है उनके आजीविका के साधनों को प्रभावित करता है.

जंगलों में आग को रोकने के लिए जनजागरुकता अहम

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि केवल विभागीय प्रयासों से जंगलों की आग पर रोक संभव नहीं है. इसके लिए जनभागीदारी सबसे अहम है. इसी उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम में पोस्टर, मुनादी और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.ग्रामीणों को यह समझाया जा रहा है कि आग लगने से होने वाला नुकसान पूरे समाज को प्रभावित करता है. आग की रोकथाम के लिए अत्याधुनिक उपकरणों, विशेषकर फायर ब्लोअर, का उपयोग भी किया जा रहा है. पिछले दो वर्षों के फायर केसों का विश्लेषण किया गया और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात करने की जानकारी दी गई.

रोकथाम और नियंत्रण के लिए आधुनिक व्यवस्था

वन अग्नि की रोकथाम और नियंत्रण के लिए बलौदाबाजार वनमण्डल द्वारा अपनाए जा रहे उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई. बताया गया कि अग्नि घटना नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जहां से लगातार निगरानी और समन्वय किया जाता है.इसके अलावा वनों में सतत गश्त के लिए स्ट्राइक फोर्स वाहनों के माध्यम से विशेष दल तैनात किए जाते हैं. कार्य आयोजना के प्रावधानों के अनुसार 6 मीटर और 12 मीटर चौड़ी फायर लाइनों की कटाई की जाती है, जिससे आग को फैलने से रोका जा सके. फायर वाचरों की नियमित तैनाती कर संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जाती है. महुआ संग्रह से जुड़े संभावित फायर केसों को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में स्थित महुआ वृक्षों की ग्रामवार गणना कर सूची तैयार की जाती है, जिससे संबंधित गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा सके.

वन प्रबंधन समितियों को मिला सम्मान

कार्यशाला के दौरान एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल भी देखने को मिली. बताया गया कि दंडखार, नावाडीह, अल्दा, सुरबाय, मुढ़ीपार और सैयाभाटा वन प्रबंधन समितियों के अंतर्गत वर्ष 2025 में एक भी आगजनी की घटना दर्ज नहीं हुई. इन समितियों की सतर्कता, सक्रिय सहभागिता और जिम्मेदार कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया. अधिकारियों ने इसे अन्य क्षेत्रों के लिए एक उदाहरण बताया और उम्मीद जताई कि बाकी समितियां भी इसी तरह सजग भूमिका निभाएगी.

वन अग्नि प्रबंधन को केवल विभागीय जिम्मेदारी न मानें, बल्कि इसे सामूहिक दायित्व समझें. मैं समाज के सभी वर्गों से जंगलों से जुड़ने, जनभागीदारी बढ़ाने और वन संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करता हूं. मैं उन कम्पार्टमेंट्स की विशेष प्रशंसा करता हूं जहां आग की कोई घटना नहीं हुई.- धम्मशील गणवीर, डीएफओ, बलौदाबाजार

वर्कशॉप में लोगों को दी गई ट्रेनिंग

कार्यशाला केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही. इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को फील्ड में ले जाकर फायर ब्लोअर के उपयोग की ट्रेनिंग दी गई. आग लगने की स्थिति में उपकरणों के सुरक्षित और प्रभावी संचालन की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई की जा सके और नुकसान को कम किया जा सके. इस ट्रेनिंग से वनकर्मियों और समिति सदस्यों का आत्मविश्वास बढ़ा और वे तकनीकी रूप जानकारी हासिल कर पाए.

बरबसपुर में आयोजित इस वन अग्नि प्रबंधन कार्यशाला से वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया. फायर सेफ्टी को लेकर वन विभाग पूरी तरह एक्टिव दिखा. इसमें लोगों और समितियों की भागीदारी भी काफी अहम साबित हुई.

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