नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब केंद्र सरकार का पूरा फोकस अवैध घुसपैठ की गंभीर चुनौती से निपटने पर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 9 जुलाई को दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में देश के सभी राज्यों के DGP और शीर्ष सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में न केवल अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की रणनीति बनेगी, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले पूरे ‘इको-सिस्टम’ को ध्वस्त करने का रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।
🔍 सिर्फ सीमा पार करना ही नहीं, फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क भी रडार पर
सरकार का स्पष्ट मानना है कि अवैध घुसपैठ केवल एक सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है। घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने, उन्हें बसाने और रोजगार दिलाने वाले नेटवर्क को चिन्हित करना इस बैठक का मुख्य एजेंडा है। गृह मंत्रालय की रणनीति है कि अलग-अलग राज्यों में टुकड़ों में कार्रवाई करने के बजाय पूरे देश में एक साथ समन्वित अभियान चलाया जाए।
📋 उच्चाधिकार प्राप्त समिति की तेज गति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बताने के बाद गृह मंत्रालय ने सेवानिवृत्त जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है। यह समिति सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ महानगरों और औद्योगिक शहरों का भी अध्ययन कर रही है। समिति ने गृह मंत्री को सूचित किया है कि वह जमीनी फीडबैक के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों का दौरा करेगी।
🌏 देशव्यापी ब्लूप्रिंट की तैयारी
सरकार का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग कार्रवाई के बजाय पूरे देश में एक साथ अभियान चलाकर ही इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। गृह मंत्री ने हाई-लेवल कमिटी को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें देने का सुझाव दिया है। 9 जुलाई को होने वाली यह बैठक देशभर में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई का ब्लूप्रिंट साबित हो सकती है। नक्सलवाद के खात्मे की तर्ज पर घुसपैठियों को देश से निकालने के लिए एक निश्चित समय-सीमा और ठोस कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
