छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित बैलाडीला लौह अयस्क की सबसे ऊंची पहाड़ी ढोलकाल पर इंडियन गॉट टैलेंट सीजन 10 के विजेताओं ने मलखंभ किया और गणपति बप्पा को विराजित किया है. हालांकि इन पहाड़ियों पर पहुंचना बहुत मुश्किल है, लेकिन होनहारों ने अपने प्रयास से पहाड़ी पर पहुंचकर कीर्तिमान स्थापित किया. वहीं आभुजमाड़ मलखंभ एकेडमी के ट्रेनर फूलसिंह सलाम ने कहा यहां पहुंचना मुश्किल है लेकिन ये एक पर्यटन का अच्छा स्थल है. इसको संरक्षित करने के लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए.
बैलाडीला लौह अयस्क की सबसे ऊंची पहाड़ी ढोलकाल पर गणपति बप्पा विराजे हैं. यहां पहुचना अपने आप मैं चुनोती से भरा है. ये समुद्र तट से तीन हजार फिट की ऊंचाई पर है. इन ऊंची पहाड़ियों में आभुजमाड़ मलखंभ एकेडमी के होनहार बच्चों ने ऊंची चोटी पर मलखंभ किया हैं.
इंडियन गॉट टैलेंट का कारनामा
इंडियन गॉट टैलेंट सीजन 10 के विजेता हैं. ये आदिवासी बच्चे जो नक्सलगढ़ से निकलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश में ही नहीं विदेशों तक अपना लोहा मनवाया है. मलखंभ एकेडमी के ट्रेनर मनोज पटेल ने कहा कि हमारा बस्तर खूबसूरत है. साथ ही यहां एक से एक जगह हैं जो देश दुनिया की नजरों से दूर हैं. हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि इन प्राचीन धरोहर को संरक्षित किया जाए, नहीं तो एक दिन ऐसा आएगा जब इनका अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा.
ऐसे किया मलखंभ
आभुजमाड़ मलखंभ एकेडमी के ट्रेनर फूलसिंह सलाम ने कहा कि इन पहाड़ियों पर मलखंभ करना बेहद कठिन है लेकिन हमने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मलखंभ किया. उन्होंने कहा कि आप लोग ये प्रयास ना करें. हमने 12 किलोमीटर की दूरी तय कर पहले ऊंची पहाड़ी पर पहुंचकर, जगह का चयन किया और फिर वहां ड्रिल कर स्पोर्ट्स बना कर टीम ने मलखंभ किया. ये चुनती से भरा था. अगर सरकार चाहे तो इस क्षेत्र को बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट बनाया जा सकता है. जिससे देश-विदेश से पर्यटक यहां ज्यादा
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