धर्मांतरित महिला के शव दफनाने को लेकर विवाद का निकला समाधान, धमतरी में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार

छत्तीसगढ़

धमतरी: जिले में धर्मांतरण और महिला के अंतिम संस्कार को लेकर उपजा विवाद बैठकों और समझाइश के साथ खत्म हो गया है. दरअसल, ओडिशा सीमा से लगे ग्राम बोराई में एक महिला की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर क्रिसमस डे पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. बताया जा रहा है कि साहू समाज की महिला ने कुछ वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपनाया था. निधन के बाद परिजन गांव में ही शव दफनाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध कर दिया.

गांव के बाहर ले गए शव तो भी बवाल: विरोध के बाद परिजन शव को लेकर नगरी पहुंचे, जहां दफनाने के लिए गड्ढा भी खोदा गया. इसकी जानकारी मिलते ही नगरी नगर के लोगों ने भी वहां अंतिम संस्कार पर आपत्ति जताई, जिससे स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई. सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया. काफी देर चली बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया. पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की समझाइश के बाद शव को फिर बोराई गांव ले जाने का निर्णय लिया गया.

हिंदू धर्म में वापसी से सुलझा विवाद: वापस गांव पहुंचने के बाद देर रात क ग्राम स्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में समाधान निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई. बताया जा रहा है कि बैठक में यह सहमति बनी कि यदि मृतिका का परिवार ईसाई धर्म को त्यागकर अपने मूल धर्म में वापस आता है और हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करता है, तभी गांव में शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा, अन्यथा शव को दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. बैठक में बनी सहमति के बाद शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शव को गांव के श्मशान घाट ले जाकर हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया.

रात में बहस होने के बाद माहौल गरमा गया था फिर बड़े बुजुर्गों के साथ बैठक में चर्चा हुई और हिंदू धर्म में वापसी की सहमति बनी जिसके बाद अंतिम संस्कार कर रहे हैं– ग्रामीण

लिख कर दिया, नहीं छोड़ेंगे हिंदू धर्म: ग्रामीण डीके साहू ने बताया कि पहले यह लोग हिंदू थे फिर दिग्भ्रमित होकर के ईसाई धर्म में प्रवेश पा चुके थे. हमारे बोराई क्षेत्र के समस्त ग्रामीणों ने बैठक की जिसमें 12 जाति के लोग उपस्थित थे. बैठक के बाद समाधान निकला कि परिवार को ईसाई धर्म से हिंदू धर्म में वापस लाने के बाद ही अंतिम संस्कार होगा. परिवार जनों ने लिखित में दिया है कि आज के बाद वे हिंदू धर्म को छोड़कर नहीं जाएंगे,

परिवार ने कहा कि गांव में जीना है, मरना है और गांव के साथ रहना है. हम किसी के बहकावे में आकर लालच में आकर उस धर्म में चले गए थे, बड़ी भूल हुई. ऐसा लिख कर दिए हमें दिए है.- ग्रामीण डीके साहू

शासन-प्रशासन ने भी दी समझाइश: बेलरगांव के तहसीलदार अखिलेश देशलहरे ने कहा कि ग्राम बोराई निवासी पुनिया बाई साहू की 24 दिसम्बर को मृत्यु हो गई थी. चूंकि पुनिया बाई कन्वर्टेड ईसाई थी तो गांव वाले शव को दफन करने के लिए विरोध कर रहे थे. शासन प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बात की और समझौता करवाते हुए शव का अंतिम संस्कार किया गया.

इस दौरान ग्राम सरपंच सहित गांव के प्रमुखजन, विभिन्न समाज के लोग, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे. पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस–प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली.

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