हरियाणा के रण में दुष्यंत की दुर्दशा, उचाना कलां सीट पर 2 निर्दलियों से भी रहे पीछे

पंजाब

हरियाणा में बीजेपी ने इतिहास रच दिया है. पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. बीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी. हालांकि, लोकसभा चुनाव आते-आते दोनों की राहें जुदा हो गईं. बावजूद इसके बीजेपी सत्ता बचाने में सफल रही थी. निर्दलियों के दम पर सरकार बचा ली थी. बीजेपी सरकार में डिप्टी सीएम रहे दुष्यंत चौटाला की इस चुनावी रण में दुर्दशा हो गई है.

उचाना कलां सीट पर बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र अत्री ने जीत दर्ज की है. हालांकि, हार-जीत का अंतर बहुत कम है. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र को महज 32 वोटों से हराया है. इस सीट पर बीजेपी को टक्कर देने की बात तो दूर दुष्यंत अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए हैं. उनसे ज्यादा वोट तो दो निर्दलियों को मिले हैं. दुष्यंत को महज 7 हजार 950 वोट मिले हैं.

पार्टी प्रत्याशी वोट
बीजेपी देवेंद्र चतर भुज अत्री 48968
कांग्रेस बृजेंद्र सिंह 48936
निर्दलीय वीरेंद्र घोघरियां 31456
निर्दलीय विकास 13458
जेजीपी दुष्यंत चौटाला 7950
निर्दलीय दिलबाग सांडिल 7373
इनेलो विनोद पाल सिंह डुलगांच 2653
आम आदमी पार्टी पवन फौजी 2495

पिछले विधानसभा चुनाव में दुष्यंत की पार्टी जेजेपी ने 10 सीटें जीत थीं और बीजेपी की सरकार बनाने में वो किंगमेकर बने थे. बीजेपी से अलग होने के बाद दुष्यंत ही नहीं उनकी पार्टी की भी दुर्दशा हो गई है. उनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुला है. दुष्यंत वो सीटें भी नहीं बचा पाए, जिन पर पिछली बार जीत दर्ज की थी.

उचाला कलां सीट पर बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र अत्री के सामने हारे कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं. बृजेंद्र लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे. उचाला कलां सीट से बृजेंद्र के पिता बीरेंद्र 5 बार विधायक चुने गए हैं. वो 1977, 1982, 1991, 1996 और 2005 में विधायक रहे हैं.

कांग्रेस को भारी पड़ा वीरेंद्र को निकालना

इस सीट पर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती निर्दलियों ने पेश की. खासकर वीरेंद्र घोघरियां ने. वीरेंद्र घोघरियां को 31 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं. वहीं विकास के खाते में 13 हजार से ज्यादा वोट गए. इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस की हार का मुख्य कारण निर्दलीय रहे. वीरेंद्र पहले कांग्रेस में थे. कांग्रेस ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर बाहर का रास्ता दिखाया था.

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