सिग्मा गैंग का ‘गेम ओवर’! दिल्ली पुलिस एनकाउंटर में बिहार-नेपाल बॉर्डर के $4$ खूंखार गैंगस्टर ढेर, कौन था गैंग का सरगना रंजन पाठक?

दिल्ली

दिल्ली में पुलिस ने गुरुवार को सिग्मा एंड कंपनी गैंग के 4 मोस्ट वांटेड अपराधियों का एनकाउंटर कर दिया है. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा था. पुलिस को जैसे ही ये इनपुट मिला, वो अलर्ट हो गई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने का जाल बिछाया गया. इसी दौरान मुठभेड़ में चारों अपराधी ढेर हो गए.

यह एनकाउंटर गुरुवार रात करीब 2:20 बजे हुआ. पुलिस के अनुसार, जैसे ही संदिग्धों की गाड़ी रोहिणी इलाके में पहुंची, टीम ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं. करीब पांच मिनट तक चली इस मुठभेड़ में चारों बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें तुरंत रोहिणी के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

चारों अपराधियों की कुंडली

जिन अपराधियों का एनकाउंटर हुआ है, उनकी पहचान रंजन पाठक (25), बिमलेश महतो उर्फ बिमलेश साहनी (25), मनीष पाठक (33) और अमन ठाकुर (21) के रूप में हुई है. रंजन, बिमलेश और मनीष बिहार के सीतामढ़ी और दरभंगा जिलों के रहने वाले थे, जबकि अमन ठाकुर दिल्ली के करावल नगर का निवासी था. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिहार और नेपाल के सीमावर्ती जिलों में हत्या, डकैती, रंगदारी और फिरौती जैसी कई संगीन वारदातों में शामिल था.

 

गैंग का सरगना रंजन पाठक था, जो अपने बेखौफ अंदाज के लिए कुख्यात था. उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और अवैध हथियारों की तस्करी के कई मामले दर्ज थे. पुलिस का कहना है कि रंजन ही इस गिरोह का संचालन करता था और वारदातों की योजना तैयार करता था. वहीं मनीष पाठक, जो रंजन का रिश्तेदार था, गैंग की स्ट्रेटेजिक प्लानिंग और पैसों की व्यवस्था देखता था. बिमलेश महतो रंजन का भरोसेमंद शूटर था और रंगदारी वसूलने में अहम भूमिका निभाता था. अमन ठाकुर, जो हाल ही में गैंग से जुड़ा था, सुपारी लेकर वारदातों को अंजाम देने का काम करता था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सिग्मा एंड कंपनी गिरोह बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था. यह गिरोह पिछले कुछ महीनों से दिल्ली-एनसीआर में ठिकाने बदल-बदल कर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था.

पुलिस ने कैसे किया एनकाउंटर?

बदमाशों को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने इलाके की घेराबंदी की और संदिग्धों की गाड़ी जैसे ही रोहिणी सेक्टर-35 के पास पहुंची, उन्हें रोकने की कोशिश की गई. इसी दौरान अपराधियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की. मुठभेड़ के बाद मौके पर कई खोखे, पिस्तौल, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.

डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि इस ऑपरेशन में किसी पुलिसकर्मी को गंभीर चोट नहीं आई है. उन्होंने कहा, हमारे पास यह पुख्ता जानकारी थी कि रंजन पाठक गिरोह बिहार चुनाव से पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था. संयुक्त टीम की तत्परता और रणनीति के चलते चारों बदमाशों का खात्मा किया गया.

घटनास्थल पर फोरेंसिक और क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन टीम पहुंच चुकी है और साक्ष्य एकत्रित कर रही है. दिल्ली और बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या गिरोह के अन्य सदस्य अभी दिल्ली-एनसीआर या बिहार में सक्रिय हैं.

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