भोपाल : मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य के विभिन्न आयोगों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आयोगों का ‘भट्टा’ बैठा दिया है। सिंघार ने एक्स पोस्ट में कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके उत्पीड़न को रोकने के लिए प्रदेश में कई आयोग बनाए गए जो 2016-17 से भाजपा के कार्यकाल में निष्क्रिय हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मानव अधिकार आयोग और सूचना आयोग आदि एक कोर्ट की तरह काम करते हैं जिनके पास सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यह शिकायतों को सुनते हैं और बिना खर्च एवं बिना किसी कोर्ट, पुलिस को शामिल किए उसका निपटारा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इन आयोगों का भट्टा बैठा दिया है। राज्य के कुल आठ प्रमुख आयोगों में से केवल तीन पिछड़ा वर्ग आयोग, सूचना आयोग और मानवाधिकार आयोग में ही अध्यक्ष नियुक्त हैं, लेकिन इनमें भी सदस्यों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि इन कमियों की वजह से इन आयोगों में आने वाली शिकायतें लंबित हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोगों की वेबसाइटें भी बंद हैं, पर आयोगों की निष्क्रियता के बावजूद, वित्त वर्ष 2017 से 2024 तक इनके संचालन पर जनता के कर से करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
सिंघार ने मांग की कि सरकार को तत्काल इन आयोगों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति करनी चाहिए, उनकी वेबसाइटों को शुरू करना चाहिए, और पारदर्शी व जवाबदेह कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, इन आयोगों के बजट का उपयोग प्रभावी ढंग से पीड़ितों के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए।
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