मिल्कीपुर का ठीकरा ‘मरे’ चुनाव आयोग पर क्यों फोड़ रहे अखिलेश यादव?

उत्तर प्रदेश

मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजे से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को मरा हुआ बताकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. अखिलेश ने संसद भवन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग मर चुका है. अब बारी उसे सफेद कपड़ा भेजने की है, जो हम जल्द ही भेज देंगे.

अखिलेश ने मिल्कीपुर में धांधली, पुलिस और प्रशासन के साथ बीजेपी गठजोड़ और फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया है. सपा मुखिया ने कहा है कि बीजेपी जैसा चाहती थी, मिल्कीपुर में चुनाव आयोग ने ऐसा ही किया. कार्रवाई के बदले आयोग के अधिकारी चुप रहे.

मिल्कीपुर में अखिलेश को हार का अंदेशा है?

चुनाव आयोग की पारदर्शिता और काम करने के तौर-तरीकों पर पहले भी सवाल उठे हैं, लेकिन यह पहली बार है, जब विपक्ष के किसी बड़े नेता ने चुनाव आयोग को मरा हुआ आयोग बताया है. अखिलेश की टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजे आने हैं.

मिल्कीपुर अयोध्या के पास की सीट है, जहां से वर्तमान सांसद अवधेश प्रसाद विधायक थे. लोकसभा चुनाव में अयोध्या की फैजाबाद सीट से अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल कर ली. इस जीत से बीजेपी बैकफुट पर चली गई थी. इसकी वजह मंदिर आंदोलन और राम मंदिर निर्माण है.

यही वजह है कि अयोध्या में हार के बाद बीजेपी ने मिल्कीपुर पर पूरा फोकस कर दिया. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सीट का मैनेजमेंट देख रहे थे. सपा ने भी पूरी ताकत झोंक रखी थी. पहली बार मिल्कीपुर सीट पर 65 प्रतिशत मतदान हुए हैं. यह आजादी के बाद सबसे ज्यादा है.

मिल्कीपुर में मतदान के टूटे रिकॉर्ड्स ने सपा को खतरे में डाल दिया है. अखिलेश के बयान को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.

90 से ज्यादा शिकायत, एक्शन नहीं

उपचुनाव में धांधली को लेकर समाजवादी पार्टी ने 90 से ज्यादा शिकायत सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए की है. अखिलेश यादव के मुताबिक कुल 500 शिकायत किए गए, लेकिन एक में भी एक्शन नहीं हुआ. खुद अखिलेश ने 4 से 5 शिकायत सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं.

इन शिकायत में धांधली और मतदाताओं को डराने की बात कही गई है. अखिलेश ने अयोध्या के पुलिस कप्तान पर ही वोटर्स आईडी चेक करने का गंभीर आरोप लगाया था. सपा को उम्मीद थी कि अगर आयोग सख्त एक्शन लेता है, तो उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त रिजल्ट से पहले ही मिल जाएगी.

नवंबर-2024 के यूपी उपचुनाव में धांधली की शिकायत पर चुनाव आयोग ने कई दारोगा को सस्पेंड कर दिया था, जिसे अखिलेश ने खूब भुनाया भी था.

क्रेडिट लड़ाई में आगे रहने की रणनीति

मिल्कीपुर चुनाव के परिणाम को दोनों ही पार्टियां अपने-अपने तरीके से भुनाने की कवायद में है. अखिलेश रिजल्ट से पहले ही चुनाव आयोग को मरा बताकर क्रेडिट की लड़ाई में आगे रहना चाहते हैं. मिल्कीपुर दलितों के लिए रिजर्व सीट है.

2024 के लोकसभा चुनाव में आधे से ज्यादा दलित सपा के पक्ष में मतदान किया. सपा गठबंधन को दलित बहुल सीटों पर एकतरफा जीत मिली. अयोध्या जैसी सामान्य सीट को भी सपा ने दलित अवधेश प्रसाद के जरिए जीत ली.

दूसरी तरफ मिल्कीपुर जीतकर बीजेपी अयोध्या की हार का बदला लेने के मूड में है. ऐसे में अखिलेश पहले ही चुनाव आयोग पर निशाना साधकर अपना पक्ष मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे क्रेडिट की लड़ाई में बीजेपी कमजोर पड़ जाए.

अखिलेश की कोशिश यह संदेश देने की भी है कि मिल्कीपुर का जो फैसला होगा, वो जनता ने नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन गठजोड़ का होगा.

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