भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला: इंदौर के होल्कर स्टेडियम में इंग्लैंड की रिसर्च के आधार पर तैयार हो रही है खास पिच

खेल

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जाने वाली T20 सीरीज का आगाज होने जा रहा है। श्रृंखला का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में खेला जाएगा, लेकिन उससे इस सीरीज के एक अन्य मुकाबले की पिच को लेकर बेहद दिलचस्प और बड़ी खबर सामने आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और वेस्टइंडीज के बीच सीरीज का तीसरा T20 मुकाबला इंदौर के ऐतिहासिक होल्कर स्टेडियम में खेला जाना है, जिसकी पिच को इस बार पूरी तरह आधुनिक और वैज्ञानिक (Scientific) तरीके से तैयार किया जा रहा है।

इस पिच को बनाने के पीछे इंग्लैंड से जुड़े शोध और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतरीन और संतुलित खेल का मैदान मिल सके।

⚖️ 200, 500 और 750 किलो के आधुनिक रोलर: क्या है पिच तैयार करने का नया तरीका?

होल्कर स्टेडियम की पिच पर हो रहे इस खास प्रयोग से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • साइंटिफिक रोलर्स का इस्तेमाल: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, होल्कर की पिच को बनाने में पारंपरिक मैनुअल रोलर्स के अलावा 200, 500 और 750 किलोग्राम वजन वाले भारी आधुनिक रोलर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें इस मैदान पर पहली बार आजमाया गया है।

  • पिच साइंस और रिसर्च: इन आधुनिक रोलर्स को आजमाने के पीछे क्रिकेट पिच की मिट्टी, नमी (Moisture), घास की जड़ों और गेंद के उछाल (Bounce) को लेकर की गई वैज्ञानिक रिसर्च है।

  • ईसीबी (ECB) और क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी का अध्ययन: इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड और इंग्लैंड की क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में यह अध्ययन किया गया है कि पिच की नमी, मिट्टी की स्थिति और रोलर का दबाव मैच के दौरान सतह के व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं।

🌧️ नमी और रोलिंग का संतुलन: भारी रोलर से ज्यादा मिट्टी की स्थिति पर जोर

आधुनिक पिच विज्ञान की बारीकियां:

  • सिर्फ भारी रोलर काफी नहीं: आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि पिच पर भारी रोलर चलाने से वह ज्यादा सख्त हो जाती है और बल्लेबाजी के अनुकूल बनती है। लेकिन आधुनिक पिच साइंस यह कहता है कि रोलिंग का असर पूरी तरह से मिट्टी की नमी और उसकी बनावट पर निर्भर करता है।

  • संतुलन की जरूरत: यदि नमी और रोलिंग का संतुलन ठीक न हो, तो जरूरत से ज्यादा दबाव यानी भारी रोलर का इस्तेमाल पिच की सतह की गुणवत्ता को बिगाड़ भी सकता है। यही कारण है कि अब मिट्टी की नमी को मापकर ही रोलर का उपयोग किया जा रहा है।

  • चेन्नई से मंगाए गए हैं रोलर्स: बीसीसीआई (BCCI) के स्पष्ट निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने चेन्नई से 200, 500 और 750 किलो वजन वाले इन तीन आधुनिक रोलर्स की व्यवस्था की है।

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सीईओ रोहित पंडित ने बताया कि यह नया डेवलपमेंट है, जो आने वाले समय में पिच क्यूरेटरों को और अधिक सटीक तरीके से मैच के अनुकूल पिच तैयार करने में मदद करेगा।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry