जालंधर डी.सी. ने सख्त एक्शन लेते हुए नितिन पाठक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। दरअसल नितिन पाठक पर बैक डेट अष्टाम बेचने का आरोप लगा था। वहीं बता दें कि सरकारी मुलाजिमों की मिलीभगत के चलते उक्त कार्रवाई होने में देरी हुई है क्योंकि डी.सी. को पत्र लिखा गया था जो फाइलों के बीच ही दबा रह गया। उक्त मामले में दोबारा जांच शुरू हुई तो नितिन पाठक पर लगे आरोप सही पाए गए।
इनकम टैक्स विभाग की जांच में पाया गया है कि कोरोना काल के समय 10-20 अष्टाम पेपर जारी हुए थे। वहीं इनकम टैक्स विभाग ने जांच के दौरान देखा कि कोविड में जब कर्फ्यू लगा था तब अष्टाम पेपर कैसे और किसे दिए गए। इस उक्त मामले को लेकर एस.डी.एम., जिला रेवेन्यू व ए.डी.सी. ने जांच में खुलासा हुआ कि कई सालों से जिस पते पर लाइसेंस लिया गया वह व्यक्ति वहां पर काम नहीं करता है वह व्यक्ति प्रशासकीय कॉम्प्लेक्स में ही काम करता है जिसके चलते अब अष्टाम फरोश का लाइसेंस रद्द किया गया है। वहीं जिला प्रशासन ने सभी मामले पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए डी.ए. लीगल को पत्र लिखा है।
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