वर्ष 1936 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में जन्मे विष्णु गेहानी, महज 11 वर्ष के थे, जब 1947 में भारत का विभाजन हुआ. उस समय उनका परिवार वहीं पुश्तैनी जमीनों पर खेती-बाड़ी करता था, लेकिन जब विभाजन हुआ तो मानों सब कुछ एकदम से बदल गया. आज करीब 89 साल के हो चुके विष्णु गेहानी बंटवारे की दास्तान सुनाते हुए कहते हैं कि उस समय तत्कालीन कलेक्टर मसूद ने मुस्लिमों को एकत्र कर गैर-मुस्लिमों को वहां से बाहर निकालने के निर्देश दिए. उसके बाद जैसे हिंसा फूट पड़ी. घर जलाए गए, दुकानें लूटी गईं, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया. पड़ोसियों के घर जलता देख गेहानी परिवार जान बचाकर भागा.
उस भयावह माहौल में एक मुस्लिम दोस्त मानों देवदूत बनकर सामने आया. उसी के साथ ऊंट पर सवार होकर विष्णु गेहानी और उनका परिवार (विष्णु, उनकी मां, बहन और जीजा) मीरपुर पहुंचे. रास्ते में कई जगह हिंसक झड़पें हो रही थीं, लेकिन वह दोस्त हर बार ढाल बनकर खड़ा हुआ. उसकी वजह से गेहानी परिवार सुरक्षित मीरपुर पहुंचा. वहां से उन्हें बसों में भरकर जोधपुर लाया गया. शुरुआती दिन मंदिरों और स्कूलों में शरण लेकर कटे.
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