पुरानी गाड़ियों पर बैन मिलीभगत का नतीजा… AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने BJP पर लगाया आरोप

दिल्ली

आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को हटाने के फैसले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कोर्ट के आदेश का बहाना बना रही बीजेपी की पोल खुल गई है. उन्होंने हमला बोला कि फरवरी में बीजेपी सरकार ने शपथ ली और चंद दिन बाद 1 जुलाई को पर्यावरण मंत्री मनजिंद सिंह सिरकार को यह एलान करना पड़ा.

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी जिस सीएक्यूएम के आदेश का सहारा ले रही है, वह आदेश तो मंत्री के एलान के काफी दिनों बाद 27 अप्रैल को ही आया था. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले ही ऑटोमोबाइल कंपनियों से सांठगांठ कर ली थी. करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाने के लिए यह फरमान जारी किया गया.

61 लाख लोग नई गाड़ी खरीदने पर मजबूर

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार के इस आदेश से राजधानी के 61 लाख लोग नई गाड़ी खरीदने के लिए मजबूर हो जाएंगे. आप नेता ने कहा कि दिल्ली की जनता ने अपनी एकजुटता के जरिए बीजेपी सरकार के कई तुगलकी फरमानों को वापस लेने के लिए मजबूर किया है. उन्होंने कहा कि अब जब बीजेपी की पोल खुली तो दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीएक्यूएम को चिट्ठी लिखी कि सरकार पुरानी गाड़ियों को डीजल-पेट्रोल नही देने का प्रतिबंध नहीं लगा पाएगी. मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को खुद ही सामने आना पड़ा.

कोर्ट के आदेश का बहानेबाजी बना रही बीजेपी

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि बीजेपी कोर्ट के आदेश का बहानेबाजी बना रही है. सच तो यह है कि पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने पहली बार 10 साल पहले 7 अप्रैल 2015 को आदेश जारी किया था. इसी तरह 10 साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2015 को आदेश दिया. 2015 से 2025 तक दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी. आप की सरकार ने कभी भी पुरानी गाड़ियों को पेट्रोल न देने को लेकर कोई फरमान नहीं जारी किया. लेकिन बीजेपी सरकार में आने के पांच महीने के अंदर ही पेट्रोल डीजल देने पर रोक लगा दी.

सीएक्यूएम से मिलीभगत होने का लगाया आरोप

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी की दिल्ली सरकार द्वारा 23 अप्रैल 2025 को सीएक्यूएम से मिलीभगत कर पुरानी गाड़ियों को डीजल-पेट्रोल नहीं देने को लेकर पत्र लिया गया और सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया. सीधे तौर पर बीजेपी की केंद्र सरकार का सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार की मिलीभगत से दिल्ली के लोगों पर यह तुगलकी फरमान थोपा गया. इनकी तरफ से कोशिश की गई कि नई लाखों गाड़ियों की बिक्री कराई जाए.

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