पाकुड़ में ग्रामीण महिलाओं ने राखी कारोबार से बनाई आत्मनिर्भरता की राह: SBI आरसेटी और JSLPS से मिला हुनर, बाजारों में भारी मांग

झारखण्ड

पाकुड़ (झारखंड): कभी घरों में चौका-बर्तन और बच्चों के लालन-पालन तक सीमित रहने वाली गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाली ग्रामीण महिलाओं ने अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है।

भाई-बहन के अटूट स्नेह के पावन पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर स्थानीय महिलाएं बड़े पैमाने पर सस्ती और आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इन हस्तनिर्मित राखियों को स्थानीय बाजारों व हाट-मेलों में बेचकर महिलाएं अपनी आजीविका को सशक्त कर रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं।

🧵 वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा: SBI आरसेटी दे रहा महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण

संस्थान की पहल और महिलाओं का कौशल विकास:

  • हुनरमंद बनाने की मुहिम: भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (SBI RSETI) इन ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को विभिन्न ट्रेडों में निशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रहा है।

  • वोकल फॉर लोकल का संकल्प: महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं, जिससे प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल रही है।

  • बाजार में बिक्री की तैयारी: रक्षाबंधन से पूर्व हाट-बाजारों में इन राखियों की बिक्री के लिए बड़े पैमाने पर स्टॉक तैयार किया जा चुका है ताकि अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सके।

🤝 JSLPS के स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर बदली जिंदगी, सीखे कई ट्रेड

महिलाओं का अनुभव और बदलाव की कहानी:

  • समूहों से जुड़ाव: महिलाओं ने बताया कि झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से वे स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ीं और इसके बाद तकनीकी प्रशिक्षण के लिए एसबीआई आरसेटी के संपर्क में आईं।

  • विविध प्रशिक्षण: राखी निर्माण से पहले महिलाएं सिलाई-कटाई, खिलौना निर्माण और ज्वेलरी मेकिंग जैसे कई हुनरमंद ट्रेडों का सफल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं।

  • आर्थिक मजबूती: त्योहार के सीजन का लाभ उठाकर महिलाएं हस्तनिर्मित उत्पादों के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं।

💼 ज्वेलरी और राखी मेकिंग से मिलेगा बेहतर मुनाफा: आरसेटी प्रबंधन

प्रशिक्षकों और संस्थान का पक्ष:

  • आकर्षक डिजाइन निर्माण: संस्थान की मुख्य प्रशिक्षक के अनुसार, कम समय में ही ग्रामीण महिलाओं ने बेहतरीन फिनिशिंग के साथ पारंपरिक व आधुनिक डिजाइनों वाली राखियां बनाना सीख लिया है।

  • आय संवर्धन का लक्ष्य: एसबीआई आरसेटी के वरिष्ठ संकाय अमित वर्द्धन ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए ज्वेलरी व राखी निर्माण का विशेष कोर्स कराया गया है, जिससे वे स्थानीय हाट-बाजारों में अपने उत्पाद बेचकर बेहतर आमदनी अर्जित कर सकें।

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