पंजाब के नए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ‘पंजाब पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2024’ को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य में पंचायत चुनाव में आरक्षण की पुरानी प्रथा बहाल हो गई है। इस संशोधन के बाद कोई भी उम्मीदवार पार्टी चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। नए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया का इस बिल को हरी झंडी देना राजभवन और राज्य सरकार के बीच अच्छे संबंधों का भी संकेत है।
पंजाब विधानसभा के पिछले मानसून सत्र में ‘पंजाब पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2024’ पारित किया गया था, जिसे राज्यपाल ने हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा सदन ने ‘पंजाब पंचायती नियम, 1994’ में भी संशोधन किया था। इस संशोधन के बाद कोई भी उम्मीदवार पार्टी चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने से अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। पंजाब सरकार अक्टूबर के मध्य में पंचायत चुनाव कराने के मूड में है।
‘पंजाब पंचायती राज अधिनियम, 1994’ की धारा 12 (4) में संशोधन के साथ, अब सरपंचों के आरक्षण के लिए ब्लॉक को एक इकाई मानकर आरक्षण का नया रोस्टर तैयार किया जाएगा, जबकि पहले जिले को एक इकाई माना जाता था। आरक्षण पैटर्न में बदलाव के साथ ही नए सिरे से आरक्षण का रोस्टर तैयार किया जाएगा। मौजूदा सरकार ने नए संशोधन के साथ सरपंचों का आरक्षण अपनी इच्छा मुताबिक करने का मौका अपने हाथ में रख लिया है। आरक्षण का पुराना रोस्टर अब खुद ही खत्म हो गया है।
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