पंजाब पुलिस के इन 2 DSPs की सेवानिवृत्ति का सुन हर कोई हैरान, जानें क्या है कारण

पंजाब

मानसा/बुढलाडा: पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के नजदीक पंजाब पुलिस के  58 वर्षीय के दो लंबे कद के 58 वर्षीय जवान अभी भी अपने सुडौल शरीर, अपने शौक और खेलों के प्रति लगाव के कारण पहचाने जाते हैं। यद्यपि एक निश्चित आयु के बाद वह अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त होने वाले हैं, फिर भी उनके सुडौल शरीर की युवा बड़कें अभी भी बरकरार हैं। उन्हें देखकर यह विश्वास करना कठिन है कि वे इतने आगे बढ़ गए हैं और अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 58 वर्ष के होकर 38 वर्ष के भ्रम में डालते हुए 2 डी.एस.पी. परमजीत सिंह संधू और गमदूर सिंह चहल युवकों को हट्ट पीछे कहने का साहस रखते हैं।

31 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे

यह पंजाब पुलिस के जवान  31 मार्च 2025 को डी.एस.पी. की नौकरी से सेवानिवृत्त हो जायेंगे। एक हैं भगवानपुर हिंगणे वाला परमजीत सिंह संधू, दूसरे हैं खनौरी से गमदूर सिंह चहल डी.एस.पी. बुढलाडा। दोनों ने एथलेटिक्स की दुनिया में पंजाब पुलिस और पंजाब का परचम लहराया है। परमजीत सिंह ऊंची कूद में पंजाब के रिकार्डधारी बन गए तथा गमदूर सिंह ने डेकाथलॉन में रिकार्ड स्थापित किया है, जो 10 इवेंटों वाला खेल है।

ये दोनों किसी को भी इस खेल के करीब भी नहीं आने देते। परमजीत सिंह और गमदूर सिंह ने अपने खर्चे पर अमेरिकी शहर लॉस एंजिल्स में आयोजित खेलों में भाग लिया और भारत के लिए 2 रजत पदक जीतकर पंजाब पुलिस और पंजाब का नाम रोशन किया। जब परमजीत सिंह 2017 में ऊंची कूद में रजत पदक और गमदूर सिंह डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीते। जब पंजाब लौटे तो उन्हें रैंक का देना पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस का यह अधिकार बनता पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

इस संबंध में खेल कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय रेफरी अजैब सिंह कैली, खेल प्रेमी एवं प्रसिद्ध लेखक मैनेजर कुलवंत सिंह, युवा गुरजंट सिंह चहल अहमदपुर, एडवोकेट गुरविंदर सिंह बीरोके ने कहा कि आज पंजाब में सरकार और पुलिस नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशे विरुद्ध विरुद्ध’ के तहत लड़ रही है। ऐसे समय में, ऐसे युवा डी.एस.पीज  को  रोल मॉडल बनाकर पेश करना  लाभदायक सिद्ध हो सकता है। ये दोनों युवा युवा पीढ़ी को बचाए रखने और उसे बनाए रखने की शक्ति जानते हैं, जिनसे नई पीढ़ी, नए खिलाड़ी भी प्रेरणा ले सकते हैं।

पंजाब सरकार को सेवानिवृत्ति की आयु और रैंक बढ़ानी चाहिए

उक्त लोगों ने कहा कि पंजाब सरकार को चाहिए कि वे दोनों सज्जनों के प्रदर्शन व खेल प्रतिभा को देखते हुए उनकी सेवानिवृत्ति समय व उनका रैंक बढ़ा कर बतौर कोच गांवों की  युवाओं को खेल के मैदानों से जोड़ने का मौका दें। जवानी खेलों के साथ जुड़ेगी तो नशों और बुराइयों से बची रहेगी।  ये दोनों युवा खिलाड़ी खेल के मैदान के सबसे आलसी खिलाड़ियों को हीरा बना सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये दोनों डी. एस.पीज पंजाब के युवाओं को बेहतरीन मार्गदर्शन दे सकते हैं और उनकी फिटनेस देखकर युवा खुद भी खेल के मैदानों का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को उनकी मांग स्वीकार कर इन युवा अधिकारियों को वेतन वृद्धि देनी चाहिए ताकि वे खेलों से जुड़ सकें और पंजाब के युवा गलत रास्ते पर जाने की बजाय सही रास्ते पर चल सकें।

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