कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार (29 मार्च) को आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के शासन में गुजरात में दलित एवं आदिवासी समुदायों के खिलाफ नफरत, भेदभाव और अत्याचार लगातार गहराता जा रहा है. उन्होंने ऊना में कोड़े मारने की 2016 की घटना के पीड़ितों के प्रति एकजुटता जताई. साथ ही संकल्प लिया कि वह न्याय मिलने तक उनकी आवाज उठाते रहेंगे.
क्या है ऊना कांड
दरअसल गुजरात में कोड़े मारने की घटना 11 जुलाई 2016 को गिर सोमनाथ जिले के ऊना कस्बे के निकट मोटा समधियाला गांव में हुई थी. जब चार दलित युवक अपने पारंपरिक पेशे के तहत उस गाय की खाल उतार रहे थे, जिसकी कुछ समय पहले किसी दूसरे गांव में मौत हो गई थी. इसके बाद खुद को गोरक्षक बताने वाले आरोपियों ने इन युवकों को कोड़े मारे. इसके बाद इन लोगों को अवैध रूप से हवालात में डाल दिया गया जहां पुलिसकर्मियों ने भी उनकी पिटाई की. इस घटना के बाद काफी बवाल मचा था.
‘एक दशक बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला’
सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा ‘करीब 10 वर्ष पहले ऊना कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था. कुछ दलित युवाओं को सरेआम निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया. उस समय मैं उनके परिवारों के साथ खड़ा था’. उन्होंने आगे कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक दशक बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला, न उनके घाव भरे हैं, उल्टा हालात और बदतर हो गए हैं.
‘हालात सुधरने के बजाय और भी भयावह हो गए’
गांधी ने कहा, ‘आज जब मैंने प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनीं तो यह स्पष्ट हुआ कि हालात सुधरने के बजाय और भी भयावह हो गए हैं. एक व्यक्ति को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके शरीर में 19 फ्रैक्चर हो गए. एक अन्य व्यक्ति का भाई सिर्फ एक सनक में जिंदा जला दिया गया’. उन्होंने कहा कि ये घटनाएं केवल अपराध नहीं बल्कि भय और अन्याय से भरे माहौल की सच्चाई हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा,सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें दबा दिया जाता है, कभी धमकियों से, तो कभी हिंसा से और कई बार हत्या करके। गुजरात में भाजपा सरकार के तहत दलितों और आदिवासी समुदायों के खिलाफ नफरत, भेदभाव और अत्याचार का वातावरण लगातार गहराता जा रहा है’. उन्होंने कहा कि ऊना के पीड़ित आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं.
‘यह लंबा इंतजार अपने आप में एक बड़ा अन्याय’
राहुल गांधी ने कहा कि 10 सालों में न्याय का यह लंबा इंतजार अपने आप में एक बड़ा अन्याय है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कुछ घटनाओं की बात नहीं है बल्कि एक व्यवस्था की विफलता है जहां कमजोरों की आवाज दबाई जा रही है और अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है. उन्होंने कहा मैं इन परिवारों के साथ पहले भी खड़ा था, आज भी खड़ा हूं और न्याय मिलने तक उनकी आवाज उठाता रहूंगा.
सासंद ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा,ऊना की चीख आज भी इंसाफ के दरवाजे पर दस्तक दे रही है। बीते 10 वर्षों से पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित गुजरात में अपमान, हिंसा और हत्या- दलितों, आदिवासियों की हकीकत बना दी गई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण मॉडल को पूरे देश पर थोपा जा रहा है.
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