महेंद्र सिंह धोनी ने टीम इंडिया के लिए 2004 में डेब्यू किया था. इसके तीन साल बाद 2007 में उन्हें टीम की कप्तानी भी मिल गई. भारतीय टीम का कप्तान बनने के बाद 2007 का टी20 वर्ल्ड कप की जीत उनकी सबसे बड़ी सफलता थी. इसके बाद से धोनी कभी नहीं रुके. वो एक के बाद एक भारत के लिए आईसीसी ट्रॉफी जीतते चले गए. 2011 में उन्होंने वनडे वर्ल्ड कप जीता और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी के विजेता बने. उन्होंने टेस्ट में भी भारत को पहली बार नंबर 1 टीम बनाया और टेस्ट का गदा हासिल किया. कप्तान रहते हुए उन्होंने आईसीसी की हर ट्रॉफी को अपने नाम किया. इसलिए उन्हें भारत का सबसे महान कप्तान कहा जाता है. अब उन्हें लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के बेटे और एक्टर अंगद बेदी ने एक बड़ा खुलासा किया है.
शुरू से कप्तान बनना चाहते थे धोनी
धोनी को इंटरनेशनल क्रिकेट में आखिरी मुकाबला 2019 में खेला था. इससे दो साल पहले उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी. 2017 में उन्होंने आखिरी बार कप्तानी की थी. इसके बाद ये जिम्मेदारी पूरी तरह से विराट कोहली को सौंप दी थी. अब बिशन सिंह बेदी के बेटे और एक्टर अंगद बेदी ने धोनी और उनकी कप्तानी से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया है. उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में एक घटना का जिक्र किया जब धोनी ने टीम इंडिया के लिया डेब्यू नहीं किया था और संघर्ष कर रहे थे. अंगद ने बताया कि रांची से आने के बाद धोनी नेशनल स्टेडियम (मेजर ध्यानचंद स्टेडियम) में आए थे.
स्टेडियम में एक नेट सेशन लगाया गया था, जिसका धोनी और अंगद दोनों ही हिस्सा था. इस दौरान धोनी को हेड कोच एमपी सिंह से मुलाकात हुई. तब एमपी सिंह ने उनसे पूछा कि “क्या आप इंडिया के लिए खेलना चाहते हैं? इसके जवाब में धोनी ने कहा- “नहीं सर, मैं इंडिया कप्तान बनना चाहता हूं.” इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि धोनी के अंदर शुरू से ही टीम इंडिया को लेकर काफी जुनून था.
धोनी की कप्तानी का रिकॉर्ड
एमएस धोनी दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं. उन्होंने भारतीय टीम के लिए 200 वनडे मुकाबलों में कप्तानी की, जिसमें 110 मैच में जीत और 74 में हार मिली, जबकि 16 मैच बिना किसी नतीजे के खत्म हुए. टेस्ट में वो विराट के बाद दूसरे सबसे सफल कप्तान हैं. धोनी ने 60 टेस्ट मैच में कप्तानी की, जिसमें 27 जीते और 18 में हार का सामना करना पड़ा. वहीं 15 मैच ड्रॉ रहे. वहीं धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम 72 मैच खेली, जिनमें से 41 में जीत और 28 में हार हुई. इसमें एक टाई रहा और दो बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गए.
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