दांव पर जिंदगियां! बसों की छत पर बैठकर लोग कर रहे यात्रा, जिम्मेदार अनजान

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के निवाड़ी में लोग बसों की छत पर बैठकर सफर करते हैं. ऐसे में लोगों की जान खतरे में रहती है. बसों की छत पर बैठे लोग दूर से ऐसे दिखते हैं. जैसे किसी ओपन-एयर एयरलाइंस की नई क्लास में सफर कर रहे हों. अंदर की सीटें भरते ही ड्राइवर या कंडक्टर बड़ी सहजता से कह देते हैं, “भाई साहब, ऊपर जगह खाली है, बैठ जाइए, हवा भी मिलेगी और ऊपर से मजा भी.”

लेकिन यह ‘रोमांच’ जानलेवा है. बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के तेज रफ्तार बस की छत पर बैठे ये यात्री सड़क पर तेज मोड़, उबड़-खाबड़ रास्तों और तारों से टकराने की दहशत में होते हैं. यह मजा नहीं, लापरवाही का सीधा प्रदर्शन है. बस संचालकों की सोच अब सेवा नहीं, सिर्फ मुनाफा हो चुकी है. नियम-कानून तो उनकी नजर में मजाक बन चुके हैं.

बसों की छत पर बैठाई जाती हैं सवारियां

बस संचालकों की प्राथमिकता सिर्फ एक है कि ज्यादा सवारी, ज्यादा कमाई. चाहे उसके लिए छत ही क्यों न भरनी पड़े. रोजगार और सुविधा की कमी वाले इलाकों में जब सरकारी परिवहन व्यवस्था लचर हो तो ऐसे निजी संचालकों की मनमानी चरम पर पहुंच जाती है. नतीजा ये कि एक छोटी सी बस में दोगुनी-तिगुनी सवारियां लादी जाती हैं.

इस तरह की लापरवाहियों से देश के कई हिस्सों में कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं. ओवरलोड बसों के पलटने या छत से गिरने की घटनाएं आए दिन खबरों में रहती हैं. लेकिन निवाड़ी जिले में शायद अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. इसलिए सभी बेफिक्र हैं. लेकिन ये बेफिक्री एक दिन भारी पड़ सकती है. आम लोगों को यह समझना चाहिए उनकी जान बेहद कीमती है.

एसडीओपी ने मामले पर क्या कहा?

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी बसें और मिनी वैन जैसे सुरक्षित साधनों की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को मजबूरी में यह विकल्प न चुनना पड़े. पृथ्वीपुर के एसडीओपी संजीव कुमार तिवारी से जब इस मामले को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई की जाएगी और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने दी जाएगी कि लोग बसों की छत पर बैठकर सफर करें, नियमानुसार ही बसों का संचालन किया जाए.

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