जालंधर : अकाली भाजपा सरकार के कार्यकाल दौरान निगम ने दो विदेशी स्वीपिंग मशीनों को किराए पर लिया था जिससे शहर की सड़कें काफी साफ होने लगी थीं परंतु तब विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी ने उन मशीनों को भारी घोटाला बता कर खूब हंगामा किया था और सत्ता में आने के बाद उस प्रौजैक्ट को रद्द कर दिया था। उसके बाद 2019 में कांग्रेस सरकार ने स्मार्ट सिटी फंड से स्वीपिंग मशीन खरीदी जो आज तक विवादों में ही चल रही है।
स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी के फंड से जालंधर निगम के पास इस समय दो स्वीपिंग मशीनें हैं जिनमें से एक तो ऑटोमेटिक विदेशी मशीन है । इन मशीनों को चलाने पर भी निगम करोड़ों रुपए खर्च करता है परंतु यह कहां चलती हैं, इसकी निगरानी करने वाला कोई अधिकारी ही नहीं है। आज शहर की सड़कों के किनारों पर पड़ी मिट्टी उठाने के लिए किराए की ट्रालियों का उपयोग हो रहा है परंतु शहर के लोगों ने आज तक स्वीपिंग मशीनों को चलते हुए या सफाई करते हुए नहीं देखा। अगर कहीं यह चलती भी हैं तो उनके साथ एक ट्रॉली चलानी पड़ती है जो साथ-साथ गंदगी और मिट्टी उठाती जाती है।
नगर निगम कमिश्नर गौतम जैन ने पत्रकारों को बताया कि पंजाब सरकार की एन कैप ग्रांट से जालंधर निगम एक नई स्वीपिंग मशीन खरीदने जा रहा है जिसे चलाने का कॉन्ट्रैक्ट भी साथ ही कर दिया जाएगा। कमिश्नर ने बताया कि निगम पास पहले भी दो स्वीपिंग मशीनें हैं। नई स्वीपिंग मशीन आने के बाद तीनों स्वीपिंग मशीनों को चलाने और पेमैंट करने का सिस्टम बदल दिया जाएगा। एक मशीन जितने किलोमीटर सड़क की सफाई करेगी उसे उतनी पेमैंट मिला करेगी। कमिश्नर ने बताया कि दोनों पुरानी मशीनों को चलाने का कॉन्ट्रैक्ट जल्द खत्म होने जा रहा है इसलिए आने वाले समय में तीनों मशीनें शहर को साफ सुथरा रखने के अभियान में साथ देंगीं।
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