मध्यप्रदेश के नीमच व मंदसौर जिले के खेत इन दिनों अफीम की खूशबू से महक रहे हैं। अफीम के पौधे से दूध निकालने की प्रक्रिया किसानों से शुरू कर दी है, यही दूध सूखने के बाद अफीम का रूप ले लेता है और इसे काला सोना के नाम से भी जाना जाता है। नीमच में 3653 व मंदसौर जिले में 4000 किसानों ने इस वर्ष अफीम की खेती की है। नारकोटिक्स विभाग द्वारा लाइसेंसी इस खेती की पहरेदारी भी किसान जबदस्त तरीके से करते है, दिन रात खेतों पर ही डेरा जमाए हुए हैं।
नीमच जिले के सिंगोली,रतनगढ घाट क्षेत्र में डोडे से लुनाई—चिराई के दौरान किसानों ने सुरक्षा और बढ़ा दी है। मोरवन के किसान गोपाल चंदेल बताते हैं कि इस काम को शुरू करने से पहले मां काली की पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद डोडे को किसान हाथ लगाते है। इस वर्ष कुछ देरी से अफीम की बुवाई हुई थी, इसलिए मार्च के अंत तक अफीम निकालने का काम चलेगा।
सुरक्षित रखकर पहरेदारी करते है किसान
मार्च महिने में नारकोटिक्स विभाग शिविर लगाकर तय मापदंडों के अनुसार किसानों से अफीम खरीदता है। जब तक किसान अफीम विभाग को सौंप न दें, तब तक राहत की सांस नहीं लेते है। गौपनीय जगह पर एकत्रित की हुई अफीम रखी जाती है और 24 घंटे उसकी पहरेदारी करते है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
