अमृतसर : लोहड़ी का पर्व नजदीक आते ही शहर में प्रतिबंधित ड्रैगन (खूनी व चाइना डोर) की ब्रिकी अंदरखाते धड़ल्ले से होनी शुरू हो गई है। इस चाइना डोर से आसमान में उड़ते पक्षियों के साथ-साथ लोगों की भी जान माल का काफी नुक्सान हो चुका है, परन्तु इसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन इस प्रतिबंधित चाइना डोर और पूर्ण तौर पर पाबंदी लगाने में नाकाम ही साबित हो रहा है।
बता दें कि इस चाइना डोर को खूनी डोर के नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि प्लॉस्टिक व अन्य प्रकार के मटीरियल से बनने वाली इस डोर के हवा में उड़ने के कारण इसकी लपेट में आने से कई लोग इससे अपनी जान तक खो चुके हैं। इसके अलावा हवा में उड़ने वाली इस घात्तक डोर के बीच कई छोटे-बड़े पक्षी भी इसकी लपेट में आकर जान गवां चुके हैं। ये खूनी डोर पर्यावरण के लिए भी नुक्सान का कारण बन रही है।
पहले जरूरत के लिए चाईना से की जाती थी इम्पोर्ट
गौरतलब है कि विगत कई वर्ष पहले ये प्लॉस्टिक डोर चाईना देश से जरूरत के लिए इम्पोर्ट की जाती थी। जैसे ही इसकी डिमांड बढ़ी तो फिर देश की राजधानी दिल्ली में ही इसके कई कारखाने खुल गए और अब इस प्लॉस्टिक डोर देश के कारखाने देश के लगभग हरेक राज्य में है। अगर ये डोर इतनी घात्तक है तो फिर देश में इस पर पूर्ण तौर से पाबंदी क्यों नहीं लगा दी जाती? इसका कारण कई इंडस्ट्री में इस डोर का प्रयोग होना है। युवाओं के बीच जीन की पैंट (जो काफी लोक प्रिय है) की सिलाई के लिए इसी चाईना डोर का प्रयोग होता है। पहले देश में इसी कारण ही इस डोर का आयात हुआ था, परंतु फिर बाद में लोग इससे पतंगे उड़ाने लगे, तो फिर इसी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया और अब ये डोर लोगों को बहुत घात्तक बनी हुई है।
क्या है चाइना डोर व क्यों है ये खतरनाक?
चाइना डोर एक प्रकार का पतंग उड़ाने के लिए उपयोग होने वाला मांझा है, जो सिंथैटिक प्लास्टिक और धातु के मिश्रण से बनता है। यह डोर अन्य सामान्य मांझों के मुकाबले काफी मजबूत होती है और यह जल्दी टूटती नहीं है। इसके निर्माण में नायलोन, शीशे की लेड, और अन्य खतरनाक कैमिकल्स का प्रयोग किया जाता है, जिससे यह न केवल मजबूत बनता है, बल्कि अन्य डोरों से ज्यादा खतरनाक भी होता है। चाइना डोर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह इंसान के लिए भी खतरनाक है और पक्षियों के लिए तो यह मौत का कारण बन सकती है।
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