राज्यसभा सांसद और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा में बोलते हुए समर्थन मूल्य खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि एमएसपी केंद्रों पर नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारी प्रशिक्षित और विश्वसनीय नहीं है। वे सुबह किसान की उपज विभिन्न कारणों का हवाला देकर रिजेक्ट कर देते हैं और वही उपज शाम को व्यापारी खरीद लेता है। इससे पता चलता है कि केंद्रों पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने एमएसपी को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एमएसपी को कानूनी दर्जा देना चाहते हैं, दूसरी ओर हरियाणा और पंजाब के किसानों को इसके लिए हड़ताल करना पड़ रही है।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, केंद्र सरकार हर साल एमएसपी खरीदी के लिए आवंटित राशि में कटौती कर रही है। एफसीआई को बीते साल खरीदी के लिए 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन इस साल राशि घटाकर सिर्फ एक लाख 93 हजार करोड़ रुपए कर दी गई है। दिग्विजय सिंह ने भ्रष्टाचार संबंधी आरोप को लेकर सांसद उपेंद्र नाथ कुशवाह के सवाल का हवाला दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी करने वाले स्टाफ की अर्हताएं तय हो और सर्वेयर की योग्यता क्या है और उसका पालन हो रहा है कि नहीं, इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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