अमृतसर : श्री अकाल तख्त साहिब से आज पांच साहिबानों द्वारा ऐतिहासिक फसील से संगत के रू-ब-रू होते पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा से सीधे सवाल पूछे गए। इस बीच प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने अपना अपराध स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जब जत्थेदार साहब ने सबूत पेश किए तो वह घिर गए।
दरअसल, श्री अकाल तख्त साहिब पर पेशी के दौरान प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने डेरा सिरसा प्रमुख को माफी देने के फैसले का समर्थन करने से इनकार कर दिया। इस पर तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि चंदूमाजरा के ऐसे बयान अखबारों में छपे हैं, इसलिए उन्हें झूठ नहीं बोलना चाहिए। इस पर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि यह उनका बयान नहीं है बल्कि कार्यालय की ओर से जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि जब उनका बयान लगा तो उन्होंने दूसरे दिन ही संज्ञान लिया। इस फैसले का समर्थन करने का सवाल ही नहीं उठता।
इस पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बकायदा अखबार में छपे उक्त बयान की कटिंग लेकर आये और पूरा बयान भी पढ़कर सुनाया। चंदूमाजरा ने फिर कहा कि ये बयान उन्होंने खुद नहीं दिया। इस पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि अगर बयान गलत था तो उन्होंने इसका खंडन क्यों नहीं किया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि चंदूमाजरा कोई नए राजनेता नहीं हैं, बल्कि संसद में भी रह चुके हैं, इसलिए उन्हें इससे खंडन करना चाहिए था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि आपका झूठा बयान लगा था तो उक्त पत्रकार के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया। इसके बाद जत्थेदार साहिब ने चंदूमाजरा को अपना पक्ष संगत के सामने रखने को कहा। इस पर चंदूमाजरा ने समूह को संबोधित करते हुए कहा कि वह इसमें शामिल नहीं था।
