अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब ने दिवंगत प्रकाश सिंह बादल से “फख्र-ए-कौम” की उपाधि वापस ले ली है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल ने अपराध कबूल कर लिया है कि उन्होंने जत्थेदार साहिबों को अपने आवास पर बुलाया और माफी के लिए डेरा सौदा साद पर दबाव डाला। इस काम में दिवंगत मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी शामिल थे। लिहाजा, प्रकाश सिंह बादल को दिया गया फख्र-ए-कौम वापिस लिया जाता है।
बता दें कि इससे पहले सुखबीर बादल ने अपने ऊपर लगे लगभग सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया। सिंह साहिबों ने उनसे ‘हां’ या ‘नहीं’ में उत्तर देने को कहा। इस मौके पर सुखबीर बादल ने सभी सवालों का जवाब ‘हां’ में दिया। बता दें कि, सुखबीर बादल पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के प्रति नरम रुख अपनाना, गुरमीत राम रहीम के वेशभूषा विवाद में सजा की बजाय शिकायत वापस लेना, 2012 में सुमेध सैनी को पंजाब पुलिस डीजीपी नियुक्त करना व बरगाड़ी कांड में सिख युवाओं की हत्या और पीड़ित को न्याय दिलाने में कमी के आरोप लगे थे। इस दौरान सुखबीर बादल ने अपनी गलती कबूल कर ली है। वहीं प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि मुझे पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। इस पर श्री अकाल तख्त द्वारा उन्हें लताड़ा गया। जत्थेदार ने कहा कि उनके पास अखबार की कटिंग है, जिनमें आपके बारे में सब छपा है। फिर कैसे इम गुनाहों से पीछे हट सकते हैं। मीटिंग में साल 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सरकार के पूर्व मंत्रियों, 2015 की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यकारिणी के सदस्यों और मौजूदा प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को बुलाया गया है।
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