प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज जन्मदिन है. वो 74 साल के हो गए हैं. सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के तमाम नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी पीएम को बधाई दी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके जन्मदिन पर एक लेटर लिखा है. इसकी पहली लाइन में बधाई देने के बाद उन्होंने अपनी कुछ शिकायतें जाहिर की हैं. पीएम से कहा है कि वो अपने नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाएं.
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे लिखते हैं, ‘प्रधानमंत्री जी, सबसे पहले मैं आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई देता हूं. साथ ही ऐसे मुद्दे पर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं, जो सीधे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा हुआ है. आप अवगत होंगे कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, हिंसक और अशिष्ट बयानों का सिलसिला चल रहा है’.
भविष्य के लिए घातक है ऐसी भाषा
‘मुझे दुःख के साथ कहना पड़ता है कि बीजेपी और आपके सहयोगी दलों के नेताओं ने जिस हिंसक भाषा का प्रयोग किया है, वह भविष्य के लिए घातक है. विश्व हैरान है कि केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री और बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश के मंत्री लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता को नंबर एक आतंकवादी कह रहे हैं. महाराष्ट्र में आपकी सरकार में सहयोगी दल के एक विधायक राहुल गांधी की जुबान काट कर लाने वाले को 11 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा कर रहे हैं. दिल्ली में बीजेपी के एक नेता कह रहे हैं कि राहुल का हश्र उनकी दादी जैसा होगा’.
लेटर में उन्होंने आगे लिखा, ‘भारतीय संस्कृति अहिंसा, सद्भाव और प्रेम के लिए विश्वभर में जानी जाती है. इन बिंदुओं को हमारे नायकों ने राजनीति में मानक के रूप में स्थापित किया. गांधीजी ने अंग्रेजों के राज में ही इन मानकों को राजनीति का अहम हिस्सा बना दिया था. आजादी के बाद संसदीय परिधि में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सम्मानजनक अहसमतियों का एक लंबा इतिहास रहा है. इसने भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को बढ़ाने का काम किया’.
आपसे अनुरोध और अपेक्षा है
‘कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ता और नेता इस बात को लेकर बहुत उद्वेलित और चिंतित हैं क्योंकि ऐसी घृणा फैलाने वाली शक्तियों के चलते राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, और राजीव गांधी को शहादत देनी पड़ी है. सत्ताधारी दल का यह राजनीतिक व्यवहार लोकतांत्रिक इतिहास का अशिष्टतम उदाहरण है’.
खरने इसी लेटर में पीएम से कहते हैं, ‘मैं आपसे अनुरोध और अपेक्षा करता हूं कि आप कृपया अपने नेताओं पर अनुशासन और मर्यादा का अंकुश लगाएं. उचित आचरण का निर्देश दें. ऐसे बयानों के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भारतीय राजनीति को पतनशील बनने से रोका जा सके. कोई अनहोनी न हो. मैं भरोसा करता हूं कि आप इन नेताओं को हिंसक बयानों को तत्काल रोकने के बारे में अपेक्षित कार्रवाई करेंगे’.
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