पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने को लेकर MP हाईकोर्ट राजी! सुप्रीम कोर्ट ने कल ही सरकार को भेजा था नोटिस

मध्य प्रदेश

 पीथमपुर में भोपाल गैस कांड के कचरा निपटान को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने 27 फरवरी से तीन चरणों में पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट निपटान के ‘प्रायोगिक परीक्षण’ की अनुमति दी है। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि 27 फरवरी से तीन चरणों में परीक्षण के तौर पर कचरे का निपटान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने मंगलवार को कचरा निपटान प्रक्रिया के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जनवरी में उच्च न्यायालय द्वारा मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की। पीथमपुर के स्थानीय लोग अपने क्षेत्र में कचरे के नियोजित निपटान का कड़ा विरोध कर रहे हैं। भोपाल गैस त्रासदी में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने अदालत से अनुरोध किया था कि जागरूकता अभियान चलाये जाने के बाद निपटान का परीक्षण करने की अनुमति दी जानी चाहिए। सिंह ने बताया कि परीक्षण तीन चरणों में किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक चरण में 10 टन कचरे का निपटान होगा। उन्होंने बताया कि पहले परीक्षण में 135 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से कचरे का निपटान किया जाएगा जबकि दूसरे और तीसरे चरण में इसे बढ़ाकर 180 किलोग्राम प्रति घंटे और 270 किलोग्राम प्रति घंटे किया जाएगा।
महाधिवक्ता ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, पहला परीक्षण 27 फरवरी को और दूसरा चार मार्च को किया जाएगा हालांकि तीसरे परीक्षण की तारीख अब तक तय नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि परीक्षण के नतीजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपे जाएंगे, जो उसके बाद ‘फीड रेट’ निर्धारित करेगा, जिस पर शेष कचरे का निपटान किया जाएगा। यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से कुल 337 टन खतरनाक कचरा पीथमपुर निपटान संयंत्र पहुंचाया गया है। अदालत में 27 मार्च को अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाएगी।

बता दें कि पीथमपुर में भोपाल गैसकांड के कचरे के निपटान को लेकर प्रदेश में जमकर बवाल हुआ था। अब बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के लगभग 377 टन खतरनाक कचरे को भोपाल से 250 किलोमीटर और इंदौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन कचरे के निपटान को लेकर बवाल हो गया था। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा था।

इससे पहले सोमवार को भोपाल गैस कांड के कचरा निपटान का मामला सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच में लिया था। कोर्ट ने केंद्र, मध्य प्रदेश और इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य के अधिकार और इंदौर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए जोखिम के मौलिक मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर ध्यान दिया।

अधिवक्ता सर्वम रीतम खरे के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता पीथमपुर में 337 टन खतरनाक रासायनिक कचरे के निपटान के अधिकारियों के फैसले से चिंतित है। याचिकाकर्ता चिन्मय मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत पेश हुए। शीर्ष अदालत ने केंद्र, मध्य प्रदेश सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा और मामले की सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की। याचिका में कहा गया है कि निपटान स्थल से एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम चार-पांच गांव स्थित हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है, “इन गांवों के निवासियों का जीवन और स्वास्थ्य अत्यधिक जोखिम में है।” इसमें कहा गया है, “यह उल्लेख करना उचित है कि गंभीर नदी सुविधा के बगल से बहती है और ‘यशवंत सागर बांध’ को पानी उपलब्ध कराती है।” इसमें कहा गया है कि यह बांध इंदौर की 40 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराता है। याचिका में दावा किया गया है, “इस स्थिति में और प्रतिवादियों की सरासर लापरवाही, तैयारी न होने और अस्पष्टता के कारण हजारों लोगों का जीवन और अंग खतरे में है।”

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