कमल नाथ के गढ़ में अंतिम किला हारी भाजपा… अपनी ही रणनीति में उलझी, बहुमत के बाद भी देखा हार का मुंह

मध्य प्रदेश

छिंदवाड़ा  पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के गढ़ में अंतिम किला जीतने की कोशिश में रही भाजपा को मुंह की खाना पड़ी। यहां भाजपा पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। यद्यपि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट करने वालों की संख्या अधिक रही, लेकिन यह संख्या उतनी नहीं रही कि प्रस्ताव पास हो पाता।

अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 27 और विपक्ष में 21 वोट पड़े। इस मामले में भाजपाई खेमे से क्रास वोटिंग की गई है। इय तरह से साफ हो गया कि छिंदवाड़ा नगर निगम में अध्यक्ष का ताज कांग्रेस के धर्मेंद्र सोनू मांगो के पास ही रहेगा।

अविश्वास प्रस्ताव पास कराने के लिए यह आंकड़ा पर्याप्त रहा

भाजपा पार्षदों ने छिंदवाड़ा के नगरनिगम अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया था। प्रस्ताव लाने से पहले भाजपा के पास अपने स्वयं के पार्षदों सहित कुल संख्या 34 रही। 48 पार्षदों वाले नगरनिगम में अविश्वास प्रस्ताव पास कराने के लिए यह आंकड़ा पर्याप्त रहा।

वोटिंग के दौरान प्रस्ताव के पक्ष में 27 और विपक्ष में 21 वोट

बता दें कि इसके लिए दो तिहाई, यानि 32 मतों की आवश्यकता रही। मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान प्रस्ताव के पक्ष में 27 और विपक्ष में 21 वोट पड़े। जबकि सदन में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या केवल 14 है। ऐसे में साफ है कि भाजपाई खेमे के सात पार्षदों ने क्रास वोटिंग की।

नगर निगम अध्यक्ष का पद ही ऐसा है, जो कांग्रेस के पास रहा

छिंदवाड़ा जिले में नगर निगम अध्यक्ष का पद ही ऐसा है, जो कांग्रेस के पास रहा। महापौर भी भाजपा का दामन थाम चुके थे, और नगर निगम के सदन में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक रही, ऐसे में भाजपा कांग्रेस के इस अंतिम किले पर कब्जा करना चाह रही थी। पूरी रणनीति बनने के बावजूद अविश्वास प्रस्ताव का गिर जाना राजनीतिक हलकों में कमल नाथ की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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