स्किन केयर: गर्मियों के मौसम में धूप और यूवी (UV) किरणों के कारण स्किन पर टैनिंग होना एक आम समस्या है। यदि समय रहते इसे दूर न किया जाए, तो यह डार्कनेस स्थायी बन सकती है। हालांकि, कई लोग नियमित रूप से सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं, फिर भी उन्हें टैनिंग का सामना करना पड़ता है। दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. विजय सिंघल ने इसके पीछे के मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला है।
🧴 सनस्क्रीन की अपर्याप्त मात्रा
डॉ. विजय का कहना है कि टैनिंग का सबसे बड़ा कारण सनस्क्रीन की सही मात्रा का उपयोग न करना है। कई लोग बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाते हैं, जिससे स्किन पूरी तरह कवर नहीं हो पाती और यूवी किरणें असर दिखाना शुरू कर देती हैं। चेहरे और खुले अंगों के लिए पर्याप्त मात्रा में क्रीम का उपयोग करना अनिवार्य है।
⏰ री-एप्लीकेशन (Re-application) में लापरवाही
अक्सर लोग सुबह एक बार सनस्क्रीन लगाकर दिनभर के लिए निश्चिंत हो जाते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है। एक्सपर्ट के अनुसार, धूप में निकलने पर सनस्क्रीन का असर कम होने लगता है, इसलिए दिन में कम से कम दो बार सनस्क्रीन को दोबारा (Re-apply) जरूर लगाना चाहिए।
🛡️ सही SPF और PA रेटिंग का चयन
सनस्क्रीन खरीदते समय हम अक्सर SPF पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन PA रेटिंग को नजरअंदाज कर देते हैं। डॉ. विजय ने बताया कि टैनिंग से बचने के लिए सनस्क्रीन में SPF (Sun Protection Factor) और PA रेटिंग का सही तालमेल होना बहुत जरूरी है। अपनी त्वचा की जरूरत और धूप के एक्सपोजर के हिसाब से ही इनका चयन करना चाहिए।
💦 पसीना और बाहरी कारक
लंबे समय तक तेज धूप में रहना, अत्यधिक पसीना आना और सीधे यूवी किरणों के संपर्क में रहने से भी टैनिंग होती है। इन स्थितियों में सनस्क्रीन का असर कम हो जाता है, इसलिए बाहरी गतिविधियों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad