पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पार्टी अब विभाजन की कगार पर खड़ी है। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक हाई-वोल्टेज बैठक ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। खबर है कि टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से बगावत कर दी है और वे भाजपा में शामिल होने की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं।
📋 बागी सांसदों की तीन प्रमुख शर्तें
सूत्रों के अनुसार, टीएमसी छोड़ने वाले सांसद बिना किसी ठोस आश्वासन के आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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2029 का टिकट: सांसद चाहते हैं कि उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट मिलने की लिखित गारंटी मिले।
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केंद्रीय सुरक्षा: राज्य स्तर पर मिलने वाली सुरक्षा छिनने के डर से बागी सांसद केंद्र से ‘वाई’ या ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
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उच्च पद: इनमें से कुछ प्रभावशाली सांसद केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले आयोगों या सरकारी कॉर्पोरेशन में चेयरमैन जैसे बड़े पदों की उम्मीद कर रहे हैं।
👥 बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे
भूपेंद्र यादव के घर हुई इस बैठक में काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय, जून मालिया और शत्रुघ्न सिन्हा (अप्रत्यक्ष रूप से) समेत कुल 11 सांसदों की सक्रिय भूमिका देखी गई है। इसके अलावा, रचना बनर्जी, यूसुफ पठान और देब अधिकारी जैसे नाम भी इस बदलाव की चर्चाओं में शामिल हैं।
⚠️ ममता बनर्जी के लिए बड़ा खतरा
यदि ये सभी सांसद अपनी शर्तों पर सहमत होकर भाजपा का दामन थाम लेते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा ‘कोऑर्डिनेटेड दल-बदल’ होगा। इससे ममता बनर्जी की पार्टी न केवल संसद में कमजोर होगी, बल्कि राज्य में टीएमसी का आधार भी पूरी तरह बिखरने की कगार पर पहुँच जाएगा।
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