मौत का पानी! 15 जान जाने के बाद भी इंदौर में सिस्टम नहीं बदला, पुराने टैंकरों के भरोसे जनता

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से लोगों के बीमार होने के अब तक कई मामले आ चुके हैं. दूषित पानी पीने की वजह से भागीरथपुरा में करीब 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. यही नहीं करीब 15 लोगों की मौत भी इसके चलते हो गई है, लेकिन इसके बावजूद इंदौर वालों को साफ पानी नहीं मिल रहा है. यहां तक कि जो टैंकर सरकार की ओर से लोगों के लिए भेजे जा रहे हैं. उनका पानी भी दूषित पाया गया है.

 रियलिटी चेक में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल दी है. सरकार की ओर से जिन टैंकरों के जरिए लोगों तक पीने का पानी पहुंचाया जा रहा है, वही पानी दूषित और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाया गया. जांच के दौरान सामने आया कि पानी सप्लाई के लिए इस्तेमाल हो रहे टैंकर करीब 40 साल पुराने और पूरी तरह जंग लगे हुए हैं. टैंकरों के अंदर गंदगी, कीचड़ और जमी हुई परत साफ तौर पर देखी गई, जिससे पानी की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर

हैरानी की बात यह है कि इलाके में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद प्रशासन अब तक लोगों को पीने योग्य साफ पानी उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहा है. भागीरथपुरा क्षेत्र में हालात बद से बदतर बने हुए हैं. यहां रहने वाले लोग आज भी पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि टैंकर से आ रहा पानी बदबूदार है और उसका रंग भी साफ नहीं है, जिससे बीमारियों का खतरा और बढ़ गया है.

बोरिंग का पानी भी बंद करने का आरोप

इस मामले में लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है. उनका कहना है कि हमें आज भी शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या कैलाश विजयवर्गीय खुद इस पानी को पीएंगे?” लोगों का आरोप है कि बोरिंग का पानी भी बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है.

तीन साल से गंदा पानी पीने को मजबूर लोग

नगर निगम इंदौर की तीन साल पुरानी आंतरिक नोटशीट से बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे साफ हो गया है कि भागीरथपुरा के लोग पिछले तीन साल से भी ज्यादा समय से गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर हैंयह एक्सक्लूसिव नोटशीट साल 2022 में तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा ने लिखी थी, जिसमें इलाके में पाइपलाइन बिछाने और साफ पेयजल आपूर्ति की जरूरत साफ तौर पर दर्ज थी.

इसके बावजूद जनवरी 2023 में बजट पारित हो जाने के बाद भी पाइपलाइन का काम शुरू नहीं किया गया. नतीजा यह रहा कि सालों से प्रशासनिक लापरवाही के चलते भागीरथपुरा के लोगों की जान से खिलवाड़ होता रहा और गंदा पानी पीने की वजह से 15 लोगों की मौत तक हो गई. सवाल यह है कि इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है, जब फाइलें महीनों तक दफ्तरों में घूमती रहीं और महापौर की ओर से साइन करने में देरी होती रही, जबकि आम लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर थे.

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