UP Voter List Error: एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में अजीबोगरीब नाम और गड़बड़ियां, चुनाव आयोग ने गलती स्वीकार कर दी सफाई

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश: राज्य में हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के दौरान मतदाता सूची में नाम, पिता के नाम और पते को लेकर कई चौंकाने वाली और अजीबोगरीब त्रुटियां सामने आई थीं। इन गड़बड़ियों के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े होने लगे थे और इसे लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं। बढ़ते विवाद और आलोचनाओं के बीच अब उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से अपनी सफाई पेश की है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्वीकार की गलती, संजय सिंह ने उठाया था सवाल

सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इन प्रशासनिक त्रुटियों की जिम्मेदारी लेते हुए अपनी गलती खुले तौर पर स्वीकार की। इसके साथ ही, आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह के उस सोशल मीडिया पोस्ट को भी रीपोस्ट किया गया जिसमें उन्होंने एक मतदाता का वीडियो शेयर कर इस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया पर इन अजब-गजब नामों के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहे थे, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी हो गई थी।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में मिले विवादित नाम

यह पूरा मामला मुख्य रूप से इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची से जुड़ा हुआ है। इस लिस्ट में मतदाताओं और उनके अभिभावकों के नाम बेहद अजीब और हास्यास्पद रूप से दर्ज पाए गए थे। सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ (जिसके पिता का नाम मूर्ख चंद यादव दर्ज था) और ‘राम ने शर्मा को मारा’ (जिसके पिता का नाम बी.कॉम दर्ज था) जैसे नाम शामिल थे। इन गंभीर त्रुटियों ने सोशल मीडिया यूजर्स को हैरान कर दिया और इस पर राजनीतिक दलों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण और सोशल मीडिया पोस्ट

इन तमाम आलोचनाओं और विवाद के बाद चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने अपने बयान में लिखा कि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते हैं। हमारे द्वारा गलती स्वीकार करने के बावजूद यह गनीमत रही कि गलती के वक्त कोई जातिगत भेदभाव नहीं हुआ और भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, अन्यथा जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने के आरोप भी लग जाते। आयोग ने इसके साथ ही उस विवादित मतदाता सूची का स्क्रीनशॉट भी साझा किया जिसमें ये भारी भूल पाई गई थी।

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