उत्तर प्रदेश कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग पर एक बार फिर से बेहद तीखा निशाना साधा गया है. पार्टी ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में बरती गई भारी अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराएगी तथा वोटर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी. यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चुनाव आयोग के अनुचित इस्तेमाल से किसी को भी जिताया और हराया जा सकता है. वहीं, पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने दोटूक कहा कि लोकतंत्र में हर हाल में हर नागरिक के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.
📊 पीलीभीत सदर में बड़ा घोटाला: एक ही विधानसभा में 13 हजार से ज्यादा एपिक नंबर समान होने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आंकड़ों के साथ बड़ा खुलासा किया. राजेंद्र पाल गौतम ने एसआईआर प्रक्रिया में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग ने बड़ा खेल किया है. जुलाई से सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 13,150 वोटर्स के एपिक (EPIC) नंबर पूरी तरह से वही हैं, सिर्फ उनके नाम बदल दिए गए हैं, यानी सीरियल नंबर और एपिक नंबर एक जैसे हैं लेकिन नाम में फेरबदल किया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि मतदान के दिन जब वह व्यक्ति वोट डालने जाएगा, तो उसका नाम सूची में नहीं मिलेगा. इसके अलावा, इसी विधानसभा से 804 नाम काट दिए गए और 26 संदिग्ध नाम जोड़े गए, जिससे कुल 16,054 वोटों की गड़बड़ी सामने आई है. कांग्रेस ने मांग की है कि यदि एक विधानसभा का यह हाल है, तो पूरे प्रदेश की वोटर लिस्ट की स्थिति क्या होगी, इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए.
⚖️ वोटर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख करेगी कांग्रेस, इमरान मसूद और सुप्रिया श्रीनेत्र ने दिए कड़े बयान
पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि वोटर आईडी कार्ड होने के बावजूद वोटिंग के दिन वोटर का नाम लिस्ट से गायब मिलना बेहद गंभीर विषय है, और इस मामले में पूरी कानूनी राय लेकर कांग्रेस संगठन अपने कार्यकर्ताओं के साथ सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेगा. वहीं, सांसद इमरान मसूद ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने वोट की हिफाजत खुद करें, क्योंकि यह देश और संविधान को बचाने की लड़ाई है. राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र ने सॉफ्टवेयर और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कह रहे हैं कि सॉफ्टवेयर का एक्सेस उनके पास नहीं है, जो अपने आप में संदेह पैदा करता है. उन्होंने प्रदेश के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे आयोग की वेबसाइट पर अपना एपिक नंबर डालकर वोटर लिस्ट में अपना नाम और विवरण अवश्य जाँच लें, ताकि ‘वन पर्सन, वन वोट’ का संवैधानिक सिद्धांत सुरक्षित रह सके.
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