Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा केस में आई बेल्ट की फॉरेंसिक ‘लिगेचर रिपोर्ट’, मौत की वजह को लेकर बड़ा खुलासा

मध्य प्रदेश

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी अपडेट सामने आया है। ट्विशा द्वारा आत्महत्या के लिए इस्तेमाल की गई बेल्ट की आधिकारिक ‘लिगेचर रिपोर्ट’ (Ligature Report) फॉरेंसिक लैब से आ गई है। फॉरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों की गहन जांच में यह बात सामने आई है कि ट्विशा के गले पर मिले लिगेचर मार्क्स (फंदे के निशान) और बरामद किए गए बेल्ट की बनावट व चौड़ाई का आपस में मिलान हो गया है, जिसमें दोनों के बीच पूर्ण समानता पाई गई है। इस फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में प्राथमिक तौर पर मौत की वजह फांसी के कारण दम घुटना (आत्महत्या) बताई गई है।

🔍 शुरुआती पोस्टमार्टम के समय डॉक्टरों को क्यों नहीं दिया गया था बेल्ट? पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर उठे गंभीर सवाल

इस पूरी वैज्ञानिक जांच के बीच सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह खड़ा हो गया है कि शुरुआती पोस्टमार्टम के दौरान फंदे में इस्तेमाल हुआ वह बेल्ट डॉक्टरों के पैनल को उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया था? नियमानुसार, फॉरेंसिक और मेडिकल-लीगल प्रक्रिया में ‘लिगेचर मटेरियल’ (फंदे की सामग्री) को सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसी मटेरियल के आधार पर फॉरेंसिक डॉक्टर्स यह तय करते हैं कि मौत वाकई फांसी लगाने से (Antemortem Hanging) हुई है या फिर किसी अन्य परिस्थिति में हत्या करने के बाद शव को फंदे पर लटकाया गया है। जानकारी के मुताबिक, भोपाल पुलिस ने घटना के कई दिनों बाद दो दिन पहले ही यह बेल्ट जांच एजेंसियों को सौंपा था, जिसके बाद यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो सकी है।

🤫 एसआईटी (SIT) चीफ एसीपी डॉ. रजनीश कश्यप का आधिकारिक बयान: ‘कोर्ट में पेश की जाएगी सीलबंद रिपोर्ट, जांच जारी’

इस संवेदनशील मामले की कमान संभाल रहे विशेष जांच दल (SIT) के चीफ व एसीपी डॉ. रजनीश कश्यप ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “ट्विशा शर्मा मामले की हर छोटे-बड़े और तकनीकी पहलुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। बेल्ट की लिगेचर रिपोर्ट हमें प्राप्त हो गई है, लेकिन चूंकि मामला अदालत के विचाराधीन है और जांच अभी जारी है, इसलिए इस रिपोर्ट के बारीक तथ्यों को अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस रिपोर्ट को सीलबंद तरीके से सीधे माननीय कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।” उधर, मृतका के पिता और भाई शुरुआत से ही स्थानीय पुलिस पर लापरवाही बरतने और रसूखदारों के दबाव में काम करने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिसे इस तकनीकी चूक से और बल मिल गया है।

⚖️ क्या होती है लिगेचर रिपोर्ट और क्यों है यह बेहद अहम? एक्सपर्ट ने बताया हत्या और आत्महत्या के बीच का अंतर

फॉरेंसिक और कानूनी मामलों के विशेषज्ञों (Experts) के अनुसार, किसी भी संदिग्ध फांसी के मामले में फंदे की चौड़ाई, उसकी सिलाई, धातु की बनावट और उसके द्वारा त्वचा पर पड़ने वाले दबाव के निशानों का मिलान मृतक के गले पर मौजूद निशानों से 3D स्कैनिंग और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए किया जाता है। यह जांच इसलिए मील का पत्थर साबित होती है क्योंकि यह आत्महत्या और गला घोंटकर की गई हत्या (Strangulation) के बीच का अंतर पूरी तरह स्पष्ट कर देती है। ट्विशा मामले में यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरुआती पोस्टमार्टम के समय डॉक्टरों के पास बेल्ट न होने के कारण पूरी नहीं हो सकी थी, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

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