हिसार में ‘हर घर एक पौधा’ अभियान से छाई हरियाली; युवाओं की इस पहल ने बदली शहर की सूरत

हरियाणा

हिसार:पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ती गर्मी आज एक गंभीर समस्या बन चुकी है. पेड़ों की लगातार कटाई के कारण वातावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. ऐसे समय में “हर घर एक पौधा” अभियान एक प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया है. इस अभियान को भूमि मित्र फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा है, जिसने अब तक 35 हजार से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया है.

400 से अधिक युवाओं की मजबूत टीम: इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत युवा हैं. भूमि मित्र फाउंडेशन से 400 से अधिक युवा जुड़े हुए हैं, जो लगातार पर्यावरण की अलख जगाने में जुटे हैं. ये युवा न केवल पौधे लगाते हैं, बल्कि उनकी देखभाल भी सुनिश्चित करते हैं. संस्था के सदस्य गांव-गांव और शहरों में जाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं.

संस्थापक का उद्देश्य: संस्था के संस्थापक अमनदीप सिंह पानू, जो चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं, उन्होंने इस पहल की शुरुआत पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की थी. उन्होंने कहा कि, “हमारा मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को बचाना और बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए मित्र बनकर कार्य करना है. शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन आज यह अभियान कई जिलों तक फैल चुका है.”

पौधारोपण के साथ जागरूकता अभियान: अमनदीप पानू ने आगे बताया कि, “संस्था केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है. यह लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए साइकिल यात्राएं भी आयोजित करती है. जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में विशेष रूप से पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, जबकि पूरे वर्ष फलदार पौधे निशुल्क वितरित किए जाते हैं. “हम लोगों को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि एक पौधा लगाने से ही भविष्य सुरक्षित हो सकता है.”

पशु-पक्षियों के लिए विशेष कार्य: भूमि मित्र फाउंडेशन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य पशु-पक्षियों की सुरक्षा है. इस बारे में अमनदीप पानू ने बताया कि, “संस्था द्वारा गर्मियों में पक्षियों के लिए घोंसले और पानी की व्यवस्था की जाती है. अब तक लगभग 2000 कृत्रिम घोंसले लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों और पार्कों में जूट से बने घोंसले लगाए गए हैं. पक्षियों के लिए आशियाना बनाना हमारी जिम्मेदारी है.”

गांवों में पर्यावरण भवन और पक्षी विहार: अमनदीप सिंह पानू ने अपने गांव में करीब दो लाख रुपये खर्च कर पशु-पक्षियों के लिए एक विशेष स्थान तैयार किया है, जिसे ‘गऊ और पक्षी विहार’ नाम दिया गया है. यहां पशु-पक्षियों के खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है. इस बारे में वो कहते हैं कि, “यह स्थान उन बेजुबानों के लिए है जो खुद अपनी देखभाल नहीं कर सकते.”

शिक्षा और समाज सेवा में योगदान: खास बात यह है कि ये संस्था केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रही है. गांव के स्कूल में एक लाइब्रेरी बनाई गई है, जहां लड़कियां और महिलाएं पढ़ाई कर सकती हैं. इसके अलावा पशुओं के लिए समय-समय पर कैंप लगाए जाते हैं, जिसमें पशुपालकों को दवाइयां बांटी जाती हैं.

हर खुशी पर पौधा लगाने की अपील: अमनदीप पानू ने आगे कहा कि, “संस्था लोगों से अपील करती है कि वे जन्मदिन, शादी और अन्य खुशी के अवसरों पर पौधे लगाएं. अगर हर व्यक्ति अपने जीवन के खास मौके पर एक पौधा लगाए, तो देश हराभरा हो सकता है. दीपावली जैसे त्योहारों पर भी लोगों को ग्रीन दीपावली मनाने के लिए प्रेरित किया जाता है.”

कई जिलों में फैल चुका अभियान: यह अभियान हांसी, हिसार, जींद, चंडीगढ़ और पंचकूला जैसे क्षेत्रों में चलाया जा चुका है. पंचकूला में एक सड़क को विशेष रूप से चुना गया, जहां पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए गए हैं. संस्था समय-समय पर अन्य पर्यावरण संगठनों के साथ मिलकर भी काम करती है.

प्रकृति के प्रति समर्पण का उदाहरण: भूमि मित्र फाउंडेशन आज एक उदाहरण बन चुकी है कि अगर युवा ठान लें तो बड़ा बदलाव संभव है. पौधारोपण, पशु-पक्षियों की देखभाल और समाज सेवा जैसे कार्यों के जरिए यह संस्था पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है. यह अभियान न केवल हरियाली बढ़ा रहा है, बल्कि लोगों के सोचने का नजरिया भी बदल रहा है.

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