चंडीगढ़ (हरियाणा): हरियाणा के सरकारी स्कूलों की बुनियादी व्यवस्था अब वास्तविक जरूरतों के आधार पर बेहतर बनाई जाएगी। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 14,300 से अधिक सरकारी स्कूलों की व्यापक ग्राउंड मैपिंग पूरी कर ली है, जिसमें स्कूलवार उपलब्ध सुविधाओं और कमियों का सटीक आकलन किया गया है। इस सर्वे के आधार पर करीब 2,800 प्राथमिक विकास कार्य चिन्हित किए गए हैं, जिनके क्रियान्वयन के लिए सरकार ने पहले चरण में ₹130 करोड़ की राशि जारी कर दी है।
📋 हर स्कूल का बना अलग ‘माइक्रो प्लान’, बुनियादी ढांचे का होगा कायाकल्प
सर्वे और विकास कार्यों का मुख्य विवरण:
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विस्तृत ग्राउंड सर्वे: सर्वे के दौरान स्कूल भवनों की स्थिति, क्लासरूम, शौचालय, चारदीवारी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया गया।
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सामूहिक भागीदारी से योजना: कनिष्ठ अभियंता (JE), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), एबीआरसी (ABRC) और स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (SMC) के समन्वय से प्रत्येक विद्यालय की जरूरत के मुताबिक अलग माइक्रो प्लान तैयार किया गया है।
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प्रमुख निर्माण कार्य: चिन्हित कार्यों में नए क्लासरूम का निर्माण, बाउंड्री वॉल, नए शौचालयों का निर्माण, पुराने जर्जर भवनों को हटाना और आवश्यक मरम्मत व रखरखाव के कार्य शामिल हैं।
♿ दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए ₹11.01 करोड़ का विशेष प्रावधान
समावेशी शिक्षा और भविष्य की कार्ययोजना:
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दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं: समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ₹11.01 करोड़ का अलग से प्रावधान किया गया है।
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शौचालय व रैंप निर्माण: इस बजट से 484 लड़कों और 173 लड़कियों के लिए सामान्य शौचालय, 97 दिव्यांग-अनुकूल शौचालय और 51 विशेष रैंप बनाए जाएंगे।
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जरूरत आधारित बजट आवंटन: स्कूलवार डिजिटल डेटा तैयार होने से अब भविष्य में भी बजट का आवंटन कागजी आंकड़ों के बजाय जमीनी आवश्यकताओं के आधार पर किया जाएगा, जिससे सरकारी स्कूलों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल तैयार हो सके।
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