मिसाल बन गई स्वीटी! गोहाना की किन्नर स्वीटी ने समाज को दिखाया आईना, शुरू किया दुग्ध फार्म और बन गईं ‘एंप्लॉयर’

हरियाणा

गोहाना: गोहाना के विष्णु नगर में ट्रांसजेंडर स्वीटी प्रधान ने समाज की पारंपरिक सोच को पीछे छोड़ते हुए मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर नई पहचान बनाई है। कभी ‘बधाई’ देकर जीवन यापन करने वाली स्वीटी आज 50 मुर्रा नस्ल की भैंसों के साथ-साथ तीन सौ से ज्यादा 2000 वर्ग गज में फैली अपनी दुग्ध फार्म डेयरी सफलतापूर्वक चला रही हैं।

करीब चार पांच वर्ष पहले स्वीटी ने मात्र तीन भैंसों और 100 वर्ग गज के प्लॉट से डेयरी की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज उनका “स्वीटी मिल्क डेयरी फार्म” क्षेत्र में गुणवत्ता और भरोसे का नाम बन चुका है। डेयरी में प्रतिदिन ढाई से तीन क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है, जो 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। मार्च से इसे 90 रुपये प्रति किलो करने की योजना है। स्वीटी की डेयरी में 10-15 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

खास बात यह है कि सभी कर्मचारियों को उन्होंने स्वयं काम सिखाया है। और वो  भी पशुओं के मेले में दूध प्रतियोगिताओं में बाहर जाती है  वहीं यहां से पंजाब, मुंबई, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक से व्यापारी मुर्रा नस्ल की भैंसें खरीदने यहां पहुंचते हैं। कई बार एक दिन में पांच से दस भैंसों की बिक्री हो जाती है।

वहीं स्वीटी का कहना है कि उनकी डेयरी की पहचान शुद्धता है। दूध में किसी प्रकार की मिलावट या उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोन इंजेक्शन का उपयोग नहीं किया जाता। उनका मानना है कि प्राकृतिक तरीके से पशुपालन ही लंबे समय तक भरोसा दिला सकता है। शुरुआती दौर में सामाजिक स्वीकार्यता आसान नहीं थी, लेकिन आज आस-पास के कॉलोनियों और गांवों से बड़ी संख्या में लोग उनके फार्म से दूध लेने आते हैं। गांव में लोग उन्हें बेटी, बहन और बुआ कहकर सम्मान देते हैं, जिसे स्वीटी अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। स्वीटी प्रधान कहती हैं, “अगर किन्नर समाज मेहनत करे तो वह किसी से कम नहीं है। सम्मान मेहनत से मिलता है। ”स्वीटी मिल्क डेयरी फार्म केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि संघर्ष,आत्मसम्मान और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है।

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