पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अकला में तीन माह की मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण के बाद से ही बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने और स्वास्थ्य कर्मियों की घोर लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई।
दूसरी ओर, क्षेत्र की एएनएम (ANM) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मौत की असली वजह उल्टी-दस्त और परिजनों द्वारा इलाज में की गई देरी को बताया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम अकला निवासी रचना गोंड को बीते मंगलवार को आंगनवाड़ी केंद्र में नियमित टीकाकरण अभियान के तहत दूसरा टीका लगाया गया था। परिजनों का दावा है कि टीका लगने के बाद से ही मासूम को लगातार तेज बुखार रहने लगा था। उन्होंने इसकी तुरंत जानकारी एएनएम और स्थानीय आशा कार्यकर्ता को दी, लेकिन इसे टीकाकरण के बाद होने वाला सामान्य बुखार बताकर गंभीरता से नहीं लिया गया। परिवार का आरोप है कि यदि समय पर उचित डॉक्टरी इलाज मिल जाता तो मासूम की जान बच सकती थी। रविवार को बच्ची की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है।
🩺 एएनएम ने आरोपों को बताया निराधार, बोलीं—’उल्टी-दस्त और इलाज में देरी से हुई मौत’
मामले के दूसरी तरफ, एएनएम आरती अहिरवार ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। उनका कहना है कि बच्ची की मृत्यु टीकाकरण के किसी दुष्प्रभाव से नहीं हुई है, बल्कि वह पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से उल्टी-दस्त से पीड़ित थी और सही समय पर अस्पताल न ले जाने व उपचार न मिलने के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पीड़ित परिवार के जुड़वा बच्चों में से एक बच्चे की पहले ही किसी बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी थी।
घटना की खबर मिलते ही बृजपुर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक और वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
🏥 स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस दुखद घटना के बाद से पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। एक तरफ परिजन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और एएनएम की लापरवाही पर लगातार सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण को मौत का कारण मानने से पूरी तरह इनकार कर रहा है।
अब ग्रामीणों, परिजनों और पुलिस प्रशासन की निगाहें जिला अस्पताल से आने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं, जिससे यह पूरी तरह साफ हो सकेगा कि मासूम की मौत टीकाकरण की प्रतिक्रिया से हुई है या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सीय वजह रही है।
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