नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज और कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर एक नई जनहित याचिका दाखिल की गई है। वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में मौजूद कमियों और खामियों की निष्पक्ष समीक्षा के लिए देश के किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
चुनावी प्रचार में धार्मिक अपील और भड़काऊ भाषणों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग
इस याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक पहचान, धार्मिक प्रतीकों, सांप्रदायिक बयानों, संप्रदाय-आधारित अपील या किसी भी प्रकार के भड़काऊ और उत्तेजक भाषणों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को सख्त निर्देश देने का आग्रह किया गया है। याचिका के पीछे मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष रखना और भविष्य के लिए इसमें आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना है।
मतदाता सूची में तकनीकी गड़बड़ी और EVM तकनीक की जांच का मुद्दा
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह याचिका किसी विशेष राजनीतिक दल या किसी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कोई फैसला चाहने या चुनाव परिणामों को चुनौती देने के उद्देश्य से दायर नहीं की गई है। हालांकि, याचिका में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि हाल ही में महाराष्ट्र की मतदाता सूची के मसौदे में तकनीकी खराबी के चलते लगभग 2,70,313 मतदाताओं की आयु 101 से 150 वर्ष के बीच दर्ज कर दी गई थी। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका में मांग की गई है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की तकनीक, कार्यशैली और नियमों की गहनता से जांच की जाए ताकि यह परखा जा सके कि हमारी EVM अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं।
आयोग के भीतर मतभेद और वोटर लिस्ट संशोधन पर जताई गई चिंता
यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के शीर्ष स्तर पर फैसलों को लेकर आपसी असहमति या मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आई हैं। याचिका में यह गंभीर चिंता भी व्यक्त की गई है कि बिना पुख्ता नियमों और सुरक्षा उपायों के जब मतदाता सूची में बड़े बदलाव या संशोधन किए जाते हैं, तो इससे कई वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम सूची से कटने या छूट जाने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता है।
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