अड़ियल रवैया पड़ा भारी! पेपर लीक बवाल के 36 दिन बाद क्यों हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा? समझें 5 बड़ी वजहें

देश

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गई थी। शुक्रवार को सीजेपी की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका केंद्र सरकार के मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से बातचीत के लिए पहुंचे थे। दोनों ने यह साफ कर दिया था कि प्रदर्शन तभी खत्म होगा, जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा।

इधर, विपक्ष ने भी धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया। शनिवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ 10 जनपथ के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा— “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कोई समझौता नहीं होगा। सरकार जब तक इस्तीफा नहीं लेती है, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होने वाला है।”

2️⃣ सड़क से लेकर संसद तक भारी बवाल

सड़क और संसद दोनों जगहों पर विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र हो रहा था। संसद की कार्यवाही 20 जुलाई से शुरू हुई थी, लेकिन पिछले 5 दिनों में एक दिन भी संसद सुचारु रूप से नहीं चल पाई। धर्मेंद्र प्रधान के मसले पर हर दिन हंगामा हुआ, जिसके कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों ठप रहे।

वहीं जनता के बीच भी आक्रोश लगातार बढ़ रहा था। दिल्ली से यह विरोध प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहा था। बिहार में शनिवार को पटना, सीवान जैसे बड़े शहरों में भारी बवाल देखा गया। इसके अलावा महाराष्ट्र और यूपी में भी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हो चुका था। चूंकि इन राज्यों में बीजेपी की सरकार है, इसलिए केंद्र सरकार कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम लेने के मूड में नहीं थी।

3️⃣ डैमेज कंट्रोल करने में रहे नाकाम

3 मई को जब नीट का पेपर लीक हुआ, तब इस विवाद को धर्मेंद्र प्रधान ठीक से संभाल नहीं पाए। शुरुआत में सरकार के स्तर पर विरोध-प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया। बाद में जब बवाल बढ़ा तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आना पड़ा। पीएम मोदी ने सख्त कानून बनाने की घोषणा की और वीडियो संदेश जारी कर छात्रों से शांति की अपील की।

वहीं पूरे मामले में धर्मेंद्र प्रधान का कोई प्रभावी बयान नहीं आया। इस पूरे बवाल के दौरान वे छात्रों से पूरी तरह से कटे रहे, जिसका बड़ा खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

4️⃣ अड़ियल रवैया और संवादहीनता

मोदी कैबिनेट में यह पहली बार है, जब किसी मंत्री को भारी विरोध के बाद हटाया गया है। 12 सालों में पहली बार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ है। प्रधान के इस्तीफे का एक मुख्य कारण उनका अड़ियल रवैया भी रहा। नीट पेपर लीक के बाद प्रधान ने छात्र नेताओं से सीधे कोई संवाद स्थापित नहीं किया।

इसके विपरीत, फरवरी 2025 में जब चंडीगढ़ में किसानों ने बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी, तब खुद तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी टीम को लेकर चंडीगढ़ पहुंच गए थे और बातचीत के जरिए पूरे विवाद को समय रहते सुलझा लिया था।

5️⃣ लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाएं और लापरवाही का आरोप

वर्ष 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था, उस वक्त भी धर्मेंद्र प्रधान ही शिक्षा मंत्री थे। सरकार ने जब पेपर लीक की घोषणा की, तब इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी का काम ऐसे ठोस सुझाव देना था, जिससे भविष्य में पेपर लीक को रोका जा सके।

राधाकृष्णन कमेटी ने पेपर लीक रोकने के लिए अपने विस्तृत सुझाव दे दिए थे, लेकिन उन्हें धरातल पर पूर्ण रूप से अमल में नहीं लाया गया। इसके अलावा एनटीए (National Testing Agency) की लगातार हो रही गंभीर लापरवाहियों का सीधा ठीकरा भी शिक्षा मंत्री पर ही फूटा। अंततः इन सब वजहों से उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा।

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