कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले में उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर रिवीजन याचिका पर सुनवाई टल गई है. राउज एवेन्यू कोर्ट अब 13 मार्च को सुनवाई करेगी. इससे पहले सोनिया गांधी ने राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में जवाब दाखिल किया था. उन्होंने अपने खिलाफ दायर याचिका का विरोध किया था.
याचिका में मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है. दरअसल, पिछले साल 11 सितंबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने विकास त्रिपाठी नाम के शख्स की शिकायत खारिज की थी, जिसमें सोनिया गांधी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने आरोप का था.
नागरिकता पहले वोटर लिस्ट में नाम
विकास त्रिपाठी ने शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी ने 1983 में भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए यहां की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाया था. विकास का यह भी कहना था कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली सीट की मतदाता लिस्ट में पहले 1980 में जुड़ा फिर 1982 में इसे डिलीट किया गया था.
अर्जी बेबुनियाद और सियासत से प्रेरित: सोनिया गांधी
इसके बाद 1983 में उनके नाम को फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ा गया था. इस मामलेसोनिया गांधी कोर्ट में पहले कह चुकी हैं कि उनके खिलाफ दायर अर्जी बेबुनियाद और सियासत से प्रेरित है. यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. इस मामले मेंनिचली अदालत ने कहा था कि नागरिकता से जुड़े मामले सिर्फ़ केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
क्रिमिनल कोर्ट इन मामलों में दखल नहीं दे सकता
कोर्ट ने कहा, वोटर लिस्ट/चुनावी विवाद को लेकर कोई मामला सिर्फ चुनाव आयोग देख सकता है. कोई क्रिमिनल कोर्ट उनके अधिकार का हनन कर इन मामलों में दखल नहीं दे सकता. शिकायत में जो आरोप लगाए गए हैं, उनके समर्थन में कोई ठोस कागज या सबूत नहीं दिया गया है.
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