हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए रखा जाता है. जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. आज, 16 मार्च 2026 को सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. पंचांग के अनुसार, आज सोम प्रदोष काल (शाम की पूजा) का सबसे शुभ समय शाम 06:29 से रात 08:53 बजे तक रहेगा. इस समय में की गई शिव पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है.
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखा जा सकता है. शाम के समय प्रदोष काल में घर या मंदिर में शिवलिंग की पूजा करें.शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और चंदन अर्पित करें. इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. आखिर में ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर तांडव करते हैं और इस समय उनकी पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलता है. इसलिए आज शाम में यानी प्रदोष काल में शिव आराधना जरूर करें.
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग ऊपर की ओर रखें.
- भगवान शिव को कुमकुम या हल्दी नहीं चढ़ाई जाती.
- पूजा करते समय मन में सकारात्मक भाव रखें और क्रोध से दूर रहें.
सोम प्रदोष व्रत के लाभ
- जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है.
- वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.
- मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.
- घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना जाता है. खासतौर पर जब प्रदोष व्रत सोमवार को आता है तो इसका महत्व और बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव अपने भक्तों की सभी परेशानियां दूर करते हैं. जो लोग सच्चे मन से यह व्रत रखते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, धन, सुख और सफलता की प्राप्ति होती है. साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होने लगती हैं.
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