शाइन सिटी घोटाला: ED का सबसे बड़ा एक्शन! राशिद नसीम भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित, ₹127.98 करोड़ की संपत्ति जब्त

उत्तर प्रदेश

लखनऊ की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शाइन सिटी ग्रुप घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके मुख्य आरोपी राशिद नसीम को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर (भगोड़ा आर्थिक अपराधी) घोषित करवाया है. इसके साथ ही कोर्ट ने नसीम और उसके सहयोगियों की 127.98 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां सरकार के पक्ष में कुर्क करने का आदेश भी दे दिया है. उत्तर प्रदेश में FEOA कानून के तहत यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.

क्या है मामला?

शाइन सिटी ग्रुप ने रियल एस्टेट और निवेश के नाम पर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये जमा किए. बाद में पता चला कि कंपनी न तो कोई असली प्रोजेक्ट बना रही थी और न ही पैसे किसी वैध कारोबार में लगाए जा रहे थे. ED की जांच में सामने आया कि कंपनी ने पॉन्जी-कम-पिरामिड स्कीम चलाकर जनता को धोखा दिया और भारी रकम अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिये बाहर निकाली. यूपी पुलिस ने इस घोटाले में 554 से ज्यादा FIR दर्ज कीं, जिसके आधार पर ED ने जांच शुरू की.

जांच में क्या मिला?

ED ने 18 ठिकानों पर छापे मारे और डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और संपत्तियों की जानकारी जुटाई. अब तक ₹264.10 करोड़ की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं और 8 लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं. ED ने इस मामले में 6 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट कोर्ट में दायर की हैं, जिनमें 38 आरोपी शामिल हैं.

कैसे भागा राशिद नसीम?

जांच के दौरान ED को पता चला कि राशिद नसीम भारत से गैर-कानूनी तरीके से नेपाल बॉर्डर के रास्ते भागकर दुबई (UAE) पहुंच गया था. उसके खिलाफ NBW, लुकआउट नोटिस और इंटरपोल रेड नोटिस तक जारी हुए, लेकिन वह वापस नहीं आया. सबसे अहम सबूत तब मिला जब ED को उसकी जूम मीटिंग्स की लिंक मिली, जो वह पीड़ितों को भेजता था ताकि उन्हें FIR वापस लेने के लिए दबाव बना सके. Zoom कंपनी से मिली जानकारी में उसके IP एड्रेस UAE के निकले, जिससे उसकी लोकेशन और फरारी की पुष्टि हो गई.

कोर्ट ने क्यों घोषित किया भगोड़ा?

ED ने FEOA के तहत कोर्ट में अर्जी दी. कोर्ट ने माना कि राशिद नसीम गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत छोड़कर भागा और यह जानते हुए भी कि उसका वॉरंट और इंटरपोल नोटिस जारी है. वह वापस नहीं आया. इसी आधार पर स्पेशल कोर्ट, PMLA ने 30 अप्रैल 2025 को उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया.

127.98 करोड़ की संपत्ति कुर्क

इसके बाद ED की याचिका पर कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को आदेश दिया कि नसीम और उसके समूह की ₹127.98 करोड़ की संपत्तियां सरकार के नाम पर जब्त की जाएं. अब ये संपत्तियां केंद्र सरकार में निहित हो गई हैं.

पीड़ितों को पैसा वापस दिलाने की तैयारी

ED ने पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए कोर्ट में याचिका दी थी कि जब्त संपत्तियों को बेचकर पैसा पीड़ितों को लौटाया जाए. इसके बाद कोर्ट ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया और अब तक 6,500 से ज्यादा निवेशकों ने अपने दावे दाखिल किए हैं. ED इन दावों की जांच कर रही है ताकि पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिल सके. शाइन सिटी ग्रुप ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन FEOA के तहत हुई हालिया जब्ती ने पीड़ितों को राहत का बड़ा रास्ता खोल दिया है.

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