शिमला-धर्मशाला फेल, दिल्ली ‘कोल्ड’ में अव्वल: पहाड़ों से ज्यादा ठंडी हुई राजधानी, @2.9°C पर थमी जिंदगी

दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली इस समय जिस ठंड का सामना कर रही है, उसने न सिर्फ आम लोगों को हैरान कर दिया है बल्कि मौसम विज्ञानियों को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. गलियों में सन्नाटा है, सड़कों पर धुंध की हल्की परत तैर रही है और सुबह-सुबह ठिठुरन इतनी तेज है कि लोग धूप निकलने का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस बार सर्दी केवल एक मौसम नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है, जिसने दिल्ली को पहाड़ों से भी ज्यादा ठंडा महसूस करा दिया है.

दिल्ली के आया नगर, पालम और सफदरजंग जैसे इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री के आसपास या उससे नीचे दर्ज किया गया, जो बीते कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ने के करीब है. खास बात यह रही कि जिस समय दिल्ली इतनी ठंड से जूझ रही थी, उसी दौरान उत्तराखंड, हिमाचल और कश्मीर के कई इलाकों में तापमान दिल्ली से अधिक रहा. यही कारण है कि लोगों के मन में एक ही सवाल घूम रहा है, आखिर दिल्ली में इतनी ठंड क्यों पड़ रही है?

पहाड़ों से भी ज्यादा ठंडी हो रही दिल्ली

आमतौर पर माना जाता है कि पहाड़ी इलाकों में ठंड ज्यादा होती है और मैदानी इलाके अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं. लेकिन इस बार तस्वीर उलटी नजर आई. कई पर्वतीय शहरों में तापमान दिल्ली से ज्यादा रहा. इसका कारण यह है कि पहाड़ों में कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल और हल्की नमी तापमान को अत्यधिक गिरने से रोक लेते हैं, जबकि दिल्ली जैसे खुले मैदानी क्षेत्र में साफ आसमान, सूखी हवा और खुला भूभाग तापमान को तेजी से नीचे गिरने देता है. दिल्ली में खुले मैदान, कंक्रीट की सतहें और प्रदूषण के कण रात के समय गर्मी को वापस नहीं रोक पाते. नतीजा यह होता है कि धरती से गर्मी तेजी से निकल जाती है और वातावरण और ठंडा हो जाता है.

वजह 1- दिल्ली पर पश्चिमी हवाओं का असर सबसे ज्यादा

दिल्ली की सर्दी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से आने वाली हवाएं हैं. ये हवाएं पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से होकर आती हैं. अपने साथ बेहद ठंडी और शुष्क हवा लेकर चलती हैं. जैसे ही ये हवाएं दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में प्रवेश करती हैं, तापमान तेजी से गिरने लगता है. दिसंबर और जनवरी के महीनों में इन हवाओं की तीव्रता और प्रभाव सबसे ज्यादा होता है. कई बार ये हवाएं कम ऊंचाई पर बहती हैं, जिससे ठंड सीधे मानव शरीर तक पहुंचती है. यही कारण है कि इन दिनों दिल्ली में केवल ठंड नहीं, बल्कि ‘गलन’ महसूस होती है.

वजह 2- पहाड़ी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाली बर्फबारी का सीधा असर दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर पड़ता है. बर्फ से ढके पहाड़ आसपास की हवा को बेहद ठंडा कर देते हैं. यही ठंडी हवा धीरे-धीरे मैदानी इलाकों की ओर बहती है और यहां के तापमान को और नीचे गिरा देती है. जब पहाड़ों में लगातार बर्फबारी होती है, तो ठंडी हवा का प्रवाह कई दिनों तक बना रहता है. इसका असर यह होता है कि दिल्ली जैसे शहरों में ठंड लंबे समय तक टिक जाती है और दिन में भी राहत नहीं मिल पाती.

वजह 3- नमी, धुंध और प्रदूषण की भूमिका

दिल्ली की सर्दी को और खतरनाक बनाने में नमी और प्रदूषण भी अहम भूमिका निभाते हैं. सुबह की वक्त यह धुंध 100-300 मीटर ऊपर उठकर हल्के बादल बना लेती है. ऐसे में जमीन पर तापमान कम ही रहता है और धूल के कण के साथ नमी भी बनी रहती है. ये बादल सूरज की किरणों को धरती तक पूरी तरह पहुंचने से रोक देते हैं. नतीजा यह होता है कि दिन में भी जमीन को पर्याप्त गर्मी नहीं मिल पाती. तापमान नीचे ही बना रहता है और ठंड लगातार महसूस होती रहती है. प्रदूषण के कण इस प्रक्रिया को और मजबूत बना देते हैं, क्योंकि वे सूरज की रोशनी को परावर्तित कर देते हैं.

वजह 4- पृथ्वी का झुकाव और मौसम का चक्र

सर्दी केवल स्थानीय कारणों से नहीं आती, बल्कि इसके पीछे पृथ्वी की संरचना और उसकी गति भी जिम्मेदार होती है. पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमते समय हल्की तिरछी रहती है. जिस समय उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य से थोड़ा दूर और झुका हुआ होता है, उस समय वहां कम धूप पहुंचती है और सर्दी का मौसम आता है. दिसंबर और जनवरी में उत्तरी गोलार्द्ध को सूर्य की सीधी किरणें कम मिलती हैं. इसलिए यहां तापमान गिर जाता है. वहीं, इसी समय दक्षिणी गोलार्द्ध में गर्मी का मौसम रहता है. यही प्राकृतिक चक्र हर साल दोहराया जाता है और हमें मौसमों का अनुभव कराता है.

शीत लहर का क्या है वैज्ञानिक अर्थ?

मौसम विज्ञान में शीत लहर केवल ठंड का नाम नहीं है. जब किसी क्षेत्र का न्यूनतम तापमान सामान्य से लगभग 4.5 से 6.5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है, तब उसे शीत लहर की श्रेणी में रखा जाता है. दिल्ली इस समय ठीक उसी स्थिति से गुजर रही है. रात के समय हवा में नमी, कम बादल और ठंडी हवाओं के कारण तापमान तेजी से गिर रहा है. दिन में धूप निकलने के बावजूद ठंड की तीव्रता कम नहीं हो रही, जिससे यह स्पष्ट है कि ठंड केवल सतही नहीं, बल्कि वातावरण की गहराई में बस चुकी है.

उत्तर प्रदेश भी ठंड की चपेट में

दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश भी इस समय शीत लहर की गिरफ्त में है. लखनऊ, मेरठ, बहराइच जैसे शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है. दिन में धूप निकलने से कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलती है, लेकिन सुबह और रात की ठंड लोगों को कंपकंपा देती है. ग्रामीण इलाकों में कोहरे और गलन का असर ज्यादा दिखाई देता है. खेतों में काम करने वाले किसान, खुले में रहने वाले मजदूर और सड़क किनारे रहने वाले लोग इस ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली और उत्तर भारत में ठंड से बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है. हल्की धूप जरूर लोगों को थोड़ी राहत दे सकती है, लेकिन पश्चिमी हवाओं और नमी के कारण ठंड बनी रह सकती है. फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह के बाद ही तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है. तब तक लोगों को सावधानी बरतने, गर्म कपड़े पहनने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है.

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