सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को: जानें पूजा की सही विधि, जलाभिषेक का नियम और जरूरी शिव मंत्र

धार्मिक

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए सनातन धर्म में अत्यंत पावन माना जाता है। इस संपूर्ण माह में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने हेतु विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक एवं व्रत का पालन करते हैं। सावन के सोमवार का धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक और विधि-विधान से पूजन करने से मनवांछित फल एवं भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप भी सावन के दूसरे सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं, तो जान लें पूजा की प्रामाणिक विधि और आवश्यक नियम।

📅 कब से कब तक है सावन 2026? जानें प्रारंभ और समापन की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन का पावन महीना 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) तक रहेगा।

28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन पर्व के साथ ही सावन माह का समापन होगा।

🪔 सावन के दूसरे सोमवार पर कैसे करें विधि-विधान से शिव पूजा?

सावन के दूसरे सोमवार के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

तदुपरांत घर के देवस्थान/पूजा स्थल की स्वच्छता सुनिश्चित करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजन का संकल्प लें। यदि घर में या समीप के मंदिर में शिवलिंग स्थापित है, तो सर्वप्रथम शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें। तत्पश्चात दूध, दही, देसी घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करने की परंपरा है। इसके पश्चात पुनः स्वच्छ जल/गंगाजल से शिवलिंग का स्नान कराएं। अभिषेक के उपरांत भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और सफेद पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं एवं धूप-दीप प्रज्वलित करें।

🌿 शिवलिंग पर क्या और कैसे चढ़ाएं? बेलपत्र और धतूरा अर्पण के नियम

भगवान शिव की पूजा में शुद्ध जल और बेलपत्र का अर्पण सर्वोपरि माना जाता है।

सावन के सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करने के पश्चात बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है। बेलपत्र अर्पित करते समय यह ध्यान रखें कि पत्तियां पूरी तरह अखंडित (बिना कटी-फटी) और स्वच्छ हों। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान आशुतोष को अति प्रिय है। इसके अतिरिक्त धतूरा, मदार (आक) के फूल और सफेद पुष्प भी अर्पित किए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि पूजा में उपयोग की जाने वाली समस्त सामग्री शुद्ध एवं पवित्र हो।

🕉️ सावन सोमवार पर करें महामृत्युंजय मंत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप

सावन के सोमवार को शिव पूजा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का विधिपूर्वक जाप करना अत्यंत कल्याणकारी एवं आरोग्यदायक माना जाता है।

इसके अतिरिक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र का निरंतर जप भी अत्यंत फलदायी होता है। शिव पूजन में मंत्र जप के साथ-साथ भगवान भोलेनाथ का ध्यान, शिव चालीसा का पाठ और आरती करना अनिवार्य माना जाता है।

🗓️ सावन 2026 के चारों सोमवार कब-कब हैं? देखें पूरी तिथियां

वर्ष 2026 में सावन माह के अंतर्गत कुल चार सोमवार पड़ेंगे, जिनकी तिथियां इस प्रकार हैं:

  • पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026

  • दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026

  • तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026

  • चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

इन चारों सोमवार व्रत के दिन श्रद्धालु भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन कर मनोवांछित आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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