Samsung, Apple, Haier, LG, Whirlpool, Lenovo और Motorola उन करीब एक दर्जन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से हैं जिन्होंने FY25 में कुल मिलाकर 1.21 लाख करोड़ से ज्यादा के कंपोनेंट और प्रोडक्ट इंपोर्ट किए हैं, कंपनियों द्वारा लेटेस्ट रेगुलेटरी फाइलिंग से इस बात का खुलासा हुआ है. कंपनियों का बाहर से प्रोडक्ट को इंपोर्ट करना कई तरह के सवाल खड़े करता है.
मेक इन इंडिया स्कीम
इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स ने इस सुधार का कारण महंगे पार्ट्स के ज्यादा इंपोर्ट और कमजोर रुपए को बताया. फाइलिंग से इस बात का पता चला है सरकार का Make in India कैंपेन 2018-19 से अब तक ज्यादातर कंपनियों के लिए वैल्यू के हिसाब से इंपोर्ट कम करने में नाकाम रहा है. FY24 में इन कंपनियों के कंसोलिडेटेड इंपोर्ट बिल में 6 फीसदी की गिरावट आई थी.
इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, एक इलेक्ट्रॉनिक्स मल्टीनेशनल कंपनी की इंडियन यूनिट के चीफ एग्जीक्यूटिव ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, मेक-इन-इंडिया पहल चाहे वह मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम हो या इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना हो या ज्यादातर तैयार माल के इंपोर्ट को रोकने के लिए रही हैं जो सफल रही हैं. इस मामले में आगे जानकारी देते हुए बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट PLI और व्हाइट गुड्स PLI स्कीम कंपोनेंट्स पर ज्यादा फोकस करती है और एक बार ये बन जाएं तो इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का इम्पोर्ट बिल कम हो जाएगा.
पिछले पांच सालों में कुछ कंपनियों के लिए रेवेन्यू के परसेंटेज के तौर पर इम्पोर्ट कम हुआ है, खासकर उनके लिए जिन्होंने अपने ज्यादातर तैयार माल का प्रोडक्शन लोकल लेवल पर शिफ्ट कर दिया है. इसमें Apple भी शामिल है, कंपनी ने iPhone का प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट कर दिया है जबकि Samsung ने टेलीविजन प्रोडक्शन के लिए ऐसा किया है. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी के फाइलिंग में इस बात की जानकारी दी गई है कि Apple India का सेल्स परसेंटेज के तौर पर कंपनी का इंपोर्ट FY25 में घटकर 23 फीसदी हो गया जो FY24 में 25 फीसदी और FY21 में 60 फीसदी था. वहीं,Samsung India की बात करें तो कंपनी का FY21 में इंपोर्ट 67 फीसदी से पिछले फिस्कल ईयर में 60 फीसदी कम हो गया.
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