पटना: बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय नई चर्चा छिड़ गई जब जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके सात सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के साथ तस्वीर साझा करते हुए इसे ‘सौहार्दपूर्ण’ बताया है।
समर्थकों का दावा और सियासत
मुलाकात के बाद स्थिति तब दिलचस्प हो गई जब आरसीपी सिंह के समर्थकों ने दावा किया कि यह मुलाकात असल में हुई ही नहीं। उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर मुलाकात रोकने के आरोप लगाए और जमकर नारेबाजी की। हालांकि, आरसीपी सिंह की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।
कौन हैं आरसीपी सिंह और जेडीयू से अलग होने की कहानी?
आरसीपी सिंह, जो 1984 बैच के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं, कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और ‘दायां हाथ’ माने जाते थे। 2021 में केंद्र में इस्पात मंत्री बनने के बाद उनके और पार्टी के रिश्तों में खटास आ गई। 2022 में राज्यसभा टिकट न मिलने और संपत्ति विवादों के चलते उन्होंने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया और अपनी पार्टी ‘आप सबकी आवाज’ (ASA) बनाई। हालांकि, बिहार में वे कोई बड़ा राजनीतिक प्रभाव नहीं छोड़ सके।
इस मुलाकात के मायने क्या हैं?
आरसीपी सिंह लंबे समय से नीतीश कुमार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते रहे हैं और अक्सर यह दोहराते रहे हैं कि उनके व्यक्तिगत संबंध आज भी कायम हैं। हालांकि, जेडीयू नेतृत्व ने अब तक उनकी वापसी की औपचारिक संभावनाओं से इनकार किया है, लेकिन इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में ‘आरसीपी फैक्टर’ फिर से प्रासंगिक हो सकता है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad