Ranchi Rare Snake Rescue: रांची में हरियाणा के युवक से दुर्लभ रेड सैंड बोआ सांप बरामद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में है करोड़ों की कीमत

झारखण्ड

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक बेहद दुर्लभ सांप का सफल रेस्क्यू किया गया है. लालपुर थाना क्षेत्र से हरियाणा के रहने वाले एक युवक के पास से ‘रेड सैंड बोआ’ (Red Sand Boa) प्रजाति का सांप बरामद किया गया है. लालपुर पुलिस के द्वारा इस मामले की तुरंत सूचना वन विभाग को दी गई, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

🚨 संदिग्ध गतिविधियों के दौरान पुलिस ने रोका, दो आरोपी मौके से हुए फरार— पूछताछ जारी

मिली जानकारी के अनुसार, लालपुर थाना क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को रुकने का इशारा किया था. पुलिस को नजदीक आते देख उनमें से दो लोग मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए, जबकि एक व्यक्ति को पुलिस ने दबोच लिया. पकड़े गए शख्स की तलाशी लेने पर उसके झोले से एक दुर्लभ प्रजाति का रेड सैंड बोआ सांप बरामद हुआ. पकड़े गए व्यक्ति की पहचान टीलू के रूप में हुई है, जो मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान टीलू ने वन विभाग को बताया है कि यह सांप उसके किसी दोस्त का है. फिलहाल पुलिस और वन विभाग की टीम संयुक्त रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि इस सांप को कहाँ से लाया गया था और रांची लाने के पीछे तस्करों का क्या उद्देश्य था. साथ ही, मौके से फरार हुए दोनों अन्य आरोपियों की भूमिका की भी बारीकी से जाँच की जा रही है.

💰 करोड़ों में बताई जाती है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत, अंधविश्वास और अवैध कारोबार से जुड़ा है मामला

इस मामले पर जानकारी देते हुए रांची के डीएफएओ श्रीकांत ने बताया कि रेड सैंड बोआ बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का सांप है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में ऊंची कीमत मिलने के अक्सर दावे किए जाते हैं. हालांकि, इस सांप की कीमत को लेकर किए जाने वाले करोड़ों रुपये के दावों की कोई आधिकारिक प्रमाणिकता नहीं है. जानकारों के मुताबिक, इस प्रजाति के सांप को लेकर कई देशों में तरह-तरह के अंधविश्वास और मान्यताएं प्रचलित हैं; चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में पारंपरिक चिकित्सा तथा लोक कथाओं के चलते इसकी मांग होने की बात सामने आती रही है. कुछ लोग इसे धन, सौभाग्य और टोटकों से जोड़कर देखते हैं, हालांकि इन सभी दावों का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है.

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