राम मंदिर निर्माण के बाद अब अयोध्या का राम निवास मंदिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। रामकोट स्थित इस प्राचीन पंचायती मंदिर के पंच प्रमुख हरिशंकर सफारीवाला ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगियों पर मंदिर को हड़पने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने दावा किया कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे मंदिर को बेचने का प्रयास किया गया।
💰 5.80 करोड़ रुपये के फर्जी सौदे का दावा
सफारीवाला का आरोप है कि चंपत राय और उनके साथियों ने मंदिर को एक ‘बिक्री योग्य संपत्ति’ के रूप में पेश करते हुए करीब 5.80 करोड़ रुपये का एक फर्जी सौदा तैयार करवाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सौदे के तहत मंदिर के पुजारी और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में लगभग 60 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। पंच प्रमुख के अनुसार, मंदिर और उससे जुड़ी जमीन की वर्तमान बाजार कीमत करीब 50 करोड़ रुपये है, जिस पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
⛔ पंचायती संपत्ति है मंदिर, निजी नहीं
प्रेस वार्ता में हरिशंकर सफारीवाला ने स्पष्ट किया कि राम निवास मंदिर एक पंचायती मंदिर है, जिसका संचालन एक पंच समिति करती है। इसे किसी व्यक्ति द्वारा बेचा या निजी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों को करोड़ों रुपये का लालच देकर परिसर खाली करने का दबाव बनाया गया, जिसे सदस्यों ने सिरे से खारिज कर दिया।
⚖️ प्रशासनिक उदासीनता और दान के पैसों पर सवाल
पंच प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों से मंदिर का नियंत्रण अवैध कब्जाधारकों के पास है। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के हिसाब पर भी सवाल उठाए, जिसका उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। सफारीवाला ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और उच्च स्तरीय अधिकारियों को इस मामले की शिकायत भेजी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
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